Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 14

Atharvaveda 8/1/14

10 Sukta
21 Mantra
8/1/14
Devata- आयुः Rishi- ब्रह्मा Chhanda- एकावसाना द्विपदा साम्नी भुरिग्बृहती Suktam- दीर्घायु सूक्त
Mantra with Swara
ते त्वा॑ रक्षन्तु॒ ते त्वा॑ गोपायन्तु॒ तेभ्यो॒ नम॒स्तेभ्यः॒ स्वाहा॑ ॥

ते । त्वा॒ । र॒क्ष॒न्तु॒ । ते । त्वा॒ । गो॒पा॒य॒न्तु॒ । तेभ्य॑: । नम॑: । तेभ्य॑: । स्वाहा॑ ॥१.१४॥

Mantra without Swara
ते त्वा रक्षन्तु ते त्वा गोपायन्तु तेभ्यो नमस्तेभ्यः स्वाहा ॥

ते । त्वा । रक्षन्तु । ते । त्वा । गोपायन्तु । तेभ्य: । नम: । तेभ्य: । स्वाहा ॥१.१४॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
१. मन्त्र १३ में कहे गये (ते) = वे छह देव (त्वा रक्षन्तु) = तेरा रक्षण करें, तुझे वासनाओं का शिकार न होने दें। (ते त्वा गोपायन्तु) = वे तेरा रक्षण करें, तुझे नाना प्रकार के रोगों से आक्रान्त न होने दें। (तेभ्यः) = उन 'बोध-प्रतिबोध आदि के द्वारा सूचित देवों के लिए (नमः) = नमस्कार हो। इन देवों का उचित आदर करते हुए हम स्वस्थ शरीर व स्वस्थ मनवाले बनें। (तेभ्यः स्वाहा) = उन देवों को अपनाने के लिए हम आत्मत्याग करते हैं [स्व+हा] बिना त्याग के हममें इन देवों का निवास सम्भव नहीं।
Essence
'बोध-प्रतिबोध' आदि देव हमारे शरीर व मन' का रक्षण करें। इन देवों को हम आदर दें। इन्हें धारण करना जीवन का लक्ष्य बनाएँ। इनके धारण के लिए स्वार्थ-त्याग करें।
Subject
तेभ्य: नमः, तेभ्यः स्वाहा [गोपन व रक्षण]