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Atharvaveda - Mantra 3

Atharvaveda 7/9/3

118 Sukta
4 Mantra
7/9/3
Devata- पूषा Rishi- उपरिबभ्रवः Chhanda- त्रिपदार्षी गायत्री Suktam- स्वस्तिदा पूषा सूक्त
Mantra with Swara
पूष॒न्तव॑ व्र॒ते व॒यं न रि॑ष्येम क॒दा च॒न। स्तो॒तार॑स्त इ॒ह स्म॑सि ॥

पूष॑न् । तव॑ । व्र॒ते । व॒यम् । न । रि॒ष्ये॒म । क॒दा । च॒न । स्तो॒तार॑: । ते॒ । इ॒ह । स्म॒सि॒ ॥१०.३॥

Mantra without Swara
पूषन्तव व्रते वयं न रिष्येम कदा चन। स्तोतारस्त इह स्मसि ॥

पूषन् । तव । व्रते । वयम् । न । रिष्येम । कदा । चन । स्तोतार: । ते । इह । स्मसि ॥१०.३॥

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1 Bhashyas
Meaning
१.हे (पूषन्) = पोषकदेव! (तव व्रते) = आपसे उपदिष्ट कर्मों में आपकी प्रासि के साधनभूत यागादि कर्मों में वर्तमान (वयम्) = हम (कदाचन न रिष्येम) = कभी हिंसित न हों, पुत्रों, मित्रों व धनादि से वियुक्त होकर दु:खी न हों। २. (इह) = इस जीवन में (ते स्तोतारः स्मसि) = आपके स्तोता बनें, सदा आपका स्मरण करते हुए उत्तम कर्मों में ही प्रवृत्त रहें, मार्गभ्रष्ट न हों।
Essence
हे पूषन् प्रभो। हम आपका स्मरण करते हुए, आपकी प्राप्ति के साधनभूत, आपसे उपदिष्ट कर्मों में प्रवृत्त रहें।


 
Subject
तव व्रते