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Atharvaveda - Mantra 3

Atharvaveda 7/80/3

118 Sukta
4 Mantra
7/80/3
Devata- प्रजापतिः Rishi- अथर्वा Chhanda- त्रिष्टुप् Suktam- पूर्णिमा सूक्त
Mantra with Swara
प्रजा॑पते॒ न त्वदे॒तान्य॒न्यो विश्वा॑ रू॒पाणि॑ परि॒भूर्ज॑जान। यत्का॑मास्ते जुहु॒मस्तन्नो॑ अस्तु व॒यं स्या॑म॒ पत॑यो रयी॒णाम् ॥

प्रजा॑ऽपते । न । त्वत् । ए॒तानि॑ । अ॒न्य: । विश्वा॑ । रू॒पाणि॑ । प॒रि॒ऽभू: । ज॒जा॒न॒ । यत्ऽका॑मा: । ते॒ । जु॒हु॒म: । तत् । न॒: । अ॒स्तु॒ । व॒यम् । स्या॒म॒ । पत॑य: । र॒यी॒णाम् ॥८५.३॥

Mantra without Swara
प्रजापते न त्वदेतान्यन्यो विश्वा रूपाणि परिभूर्जजान। यत्कामास्ते जुहुमस्तन्नो अस्तु वयं स्याम पतयो रयीणाम् ॥

प्रजाऽपते । न । त्वत् । एतानि । अन्य: । विश्वा । रूपाणि । परिऽभू: । जजान । यत्ऽकामा: । ते । जुहुम: । तत् । न: । अस्तु । वयम् । स्याम । पतय: । रयीणाम् ॥८५.३॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. हे (प्रजापते) = प्रजाओं के स्वामिन् प्रभो! (त्वत् अन्य:) = आपसे भिन्न अन्य कोई (एतानि विश्वा रूपाणि) = इन सब दृश्यमान पदार्थों को (परिभूः न जजान) = व्याप्त होकर पैदा नहीं कर रहा। आप ही इन सब रूपों को जन्म देनेवाले हैं। २. (यत्कामा:) = जिस कामनावाले होकर हम (ते जुहुम:) = तेरे लिए हवियाँ देते हैं, हवियों के द्वारा आपका पूजन करते हैं, (तत् न: अस्तु) = वह हमें प्राप्त हो। आपके अनुग्रह से (वयम्) = हम (रयीणां पतयः स्याम) = धनों के स्वामी हों।
Essence
प्रभु ही सब पदार्थों में व्याप्त होकर इन्हें जन्म दे रहे हैं। हम जिस कामना से युक्त होकर प्रभु का उपासन करते हैं, हमारी वह कामना पूर्ण होती है। प्रभु के अनुग्रह से ही हम धनों के स्वामी बनते हैं।
Subject
प्रजापति