Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 3

Atharvaveda 7/73/3

118 Sukta
11 Mantra
7/73/3
Devata- घर्मः, अश्विनौ Rishi- अथर्वा Chhanda- जगती Suktam- धर्म सूक्त
Mantra with Swara
स्वाहा॑कृतः॒ शुचि॑र्दे॒वेषु॑ य॒ज्ञो यो अ॒श्विनो॑श्चम॒सो दे॑व॒पानः॑। तमु॒ विश्वे॑ अ॒मृता॑सो जुषा॒णा ग॑न्ध॒र्वस्य॒ प्रत्या॒स्ना रि॑हन्ति ॥

स्वाहा॑ऽकृत: । शुचि॑: । दे॒वेषु॑ । य॒ज्ञ: । य: । अ॒श्विनो॑: । च॒म॒स॒: । दे॒व॒ऽपान॑: । तम् । ऊं॒ इति॑ । विश्वे॑ । अ॒मृता॑स: । जु॒षा॒णा: । ग॒न्ध॒र्वस्य॑ । प्रति॑ । आ॒स्ना । रि॒ह॒न्ति॒ ॥७७.३॥

Mantra without Swara
स्वाहाकृतः शुचिर्देवेषु यज्ञो यो अश्विनोश्चमसो देवपानः। तमु विश्वे अमृतासो जुषाणा गन्धर्वस्य प्रत्यास्ना रिहन्ति ॥

स्वाहाऽकृत: । शुचि: । देवेषु । यज्ञ: । य: । अश्विनो: । चमस: । देवऽपान: । तम् । ऊं इति । विश्वे । अमृतास: । जुषाणा: । गन्धर्वस्य । प्रति । आस्ना । रिहन्ति ॥७७.३॥

Meaning
१. (यज्ञ:) = यज्ञ (देवेषु) = देववृत्ति के व्यक्तियों में (स्वाहाकृतः) = स्वार्थत्याग के द्वारा सिद्ध हुआ है। देववृत्ति के व्यक्ति निजू जीवन के व्ययों को कम करते हुए यज्ञों को सिद्ध करते हैं। यह यज्ञ (शुचि:) = जीवन को पवित्र बनानेवाला है। यह यज्ञ वह है (य:) = जोकि (अश्विनो: चमस:) = प्राणापान का-सोमपान का पात्र ही है। यज्ञ से जीवन पवित्र बनता है और वासनाओं से अनाक्रान्त होने के कारण शरीर में सोमरक्षण सम्भव होता है। यह यज्ञ (देवपान:) = दिव्य गुणों का रक्षक है। यज्ञ से दिव्यगुणों का वर्धन होता है। २. (तम् उ) = उस यज्ञ को निश्चय से (जुषाणा:) = प्रीतिपूर्वक सेवन करते हुए (विश्वे) = सब लोग (अमृतास:) = नौरोग शरीरवाले होते हैं, अत: देव लोग इस यज्ञ को (गन्धर्वस्य आस्ना) = वेदनाणी के धारक पुरुष के मुख से (प्रतिरिहन्ति) = प्रतिदिन आस्वादित करते हैं, अर्थात् ये देव मन्त्रोच्चारण करते हुए यज्ञ में प्रवृत्त होते हैं।

 
Essence
स्वार्थत्याग होने पर ही यज्ञ सम्भव होता है। यह जीवन को पवित्र बनाता है, तभी सोम का रक्षण सम्भव होता है और दिव्य गुणों का वर्धन होता है। इस यज्ञ को वेदमन्त्रोच्चारणपूर्वक प्रीति से सेवन करते हुए लोग अमृत-नीरोग होते हैं।
Subject
यज्ञ व अमृतत्व,

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.