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Atharvaveda - Mantra 5

Atharvaveda 7/60/5

118 Sukta
7 Mantra
7/60/5
Devata- वास्तोष्पतिः, गृहसमूहः Rishi- ब्रह्मा Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- रम्यगृह सूक्त
Mantra with Swara
उप॑हूता इ॒ह गाव॒ उप॑हूता अजा॒वयः॑। अथो॒ अन्न॑स्य की॒लाल॒ उप॑हूतो गृ॒हेषु॑ नः ॥

उप॑ऽहूता: । इ॒ह । गाव॑: । उप॑ऽहूता: । अ॒ज॒ऽअ॒वय॑: । अथो॒ इति॑ । अन्न॑स्य । की॒लाल॑: । उप॑ऽहूत: । गृ॒हेषु॑ । न॒: ॥६२.५॥

Mantra without Swara
उपहूता इह गाव उपहूता अजावयः। अथो अन्नस्य कीलाल उपहूतो गृहेषु नः ॥

उपऽहूता: । इह । गाव: । उपऽहूता: । अजऽअवय: । अथो इति । अन्नस्य । कीलाल: । उपऽहूत: । गृहेषु । न: ॥६२.५॥

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Meaning
१. (इह) = यहाँ घर में (गावः उपहुता:) = गौवों के लिए प्रार्थना की गई है। इसी प्रकार (अजावयः उपहताः) = भेड़ और बकरियों के लिए प्रार्थना की गई है (अथो) = और (अन्नस्य कीलाल:) = अन्न का सारभूत अंश, अर्थात् उत्कृष्ट सात्विक अन्न (न: गृहेषु) = हमारे घरों में (उपहत:) = प्रार्थित हुआ है।
Essence
हमारे घरों में गौवें, भेड़ें, बकरियाँ हों तथा इन घरों में अन्न के सारभूत अंश की, पौष्टिक अन्न की कमी न हो।
Subject
गौ, अजा, अवि वकीलाल अन्न