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Atharvaveda - Mantra 3

Atharvaveda 7/60/3

118 Sukta
7 Mantra
7/60/3
Devata- वास्तोष्पतिः, गृहसमूहः Rishi- ब्रह्मा Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- रम्यगृह सूक्त
Mantra with Swara
येषा॑म॒ध्येति॑ प्र॒वस॒न्येषु॑ सौमन॒सो ब॒हुः। गृ॒हानुप॑ ह्वयामहे॒ ते नो॑ जानन्त्वाय॒तः ॥

येषा॑म् । अ॒धि॒ऽएति॑ । प्र॒ऽवस॑न् । येषु॑ । सौ॒म॒न॒स: । ब॒हु: । गृ॒हान् । उप॑ । ह्व॒या॒म॒हे॒ । ते । न॒: । जा॒न॒न्तु॒ । आ॒ऽय॒त: ॥६२.३॥

Mantra without Swara
येषामध्येति प्रवसन्येषु सौमनसो बहुः। गृहानुप ह्वयामहे ते नो जानन्त्वायतः ॥

येषाम् । अधिऽएति । प्रऽवसन् । येषु । सौमनस: । बहु: । गृहान् । उप । ह्वयामहे । ते । न: । जानन्तु । आऽयत: ॥६२.३॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. जब घर सुन्दर होता है तब प्रवास में घर की याद आती ही है। (प्रवसन्) = देशान्तर में बसता हुआ पुरुष (येषां अध्येति) = जिनका स्मरण करता है, (येषु) = जिनमें (बहुः सौमनस:) = बहुत सौमनस्य है-जिनमें रहनेवाले मनुष्य प्रसन्न मनवाले हैं, उन (गृहान्) = घरों को (उपह्वायामहे) = प्राप्त करने के लिए हम प्रार्थना करते हैं। (ते) = वे घर (आयत: न:) = प्रवास से लौटे हुए हमें (जानन्तु) = जानें, घर के लोग प्रसन्नता से हमारा स्वागत करें।
Essence
हमारा घर व घर के लोग ऐसे अच्छे हों कि हमें प्रवास में घर का ही स्मरण हो। ऐसे घरों में जब हम लौटें तब घरवाले प्रसन्नता से हमारा स्वागत करें।
Subject
येषु सौमनसः बहु