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Atharvaveda - Mantra 1

Atharvaveda 7/48/1

118 Sukta
2 Mantra
7/48/1
Devata- राका Rishi- अथर्वा Chhanda- जगती Suktam- राका सूक्त
Mantra with Swara
रा॒काम॒हं सु॒हवा॑ सुष्टु॒ती हु॑वे शृ॒णोतु॑ नः सु॒भगा॒ बोध॑तु॒ त्मना॑। सीव्य॒त्वपः॑ सू॒च्याच्छि॑द्यमानया॒ ददा॑तु वी॒रं श॒तदा॑यमु॒क्थ्य॑म् ॥

रा॒काम् । अ॒हम् । सु॒ऽहवा॑ । सु॒ऽस्तु॒ती । हु॒वे॒ । शृ॒णोतु॑ । न॒: । सु॒ऽभगा॑ । बोध॑तु । त्मना॑ । सीव्य॑तु । अप॑: । सू॒च्या । अच्छि॑द्यमानया । ददा॑तु । वी॒रम् । श॒तऽदा॑यम् । उ॒क्थ्य᳡म् ॥५०.१॥

Mantra without Swara
राकामहं सुहवा सुष्टुती हुवे शृणोतु नः सुभगा बोधतु त्मना। सीव्यत्वपः सूच्याच्छिद्यमानया ददातु वीरं शतदायमुक्थ्यम् ॥

राकाम् । अहम् । सुऽहवा । सुऽस्तुती । हुवे । शृणोतु । न: । सुऽभगा । बोधतु । त्मना । सीव्यतु । अप: । सूच्या । अच्छिद्यमानया । ददातु । वीरम् । शतऽदायम् । उक्थ्यम् ॥५०.१॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. (राकाम्) = [राका पूर्णे निशाकरे] पूर्ण निशाकर [चन्द्र] के समान शोभायमान इस गृहपत्नी को मैं (सुहवा) = उत्तम प्रकार से तथा (सुष्टुती) = उत्तम स्तुतिवचनों द्वारा (हुवे) = पुकारता हूँ। यह (सुभगा) = सौभाग्यवती पत्नी (नः शृणोतु) = हमारी पुकार को सुने। (त्मना बोधतु) = और स्वयं ही कुशलता से हमारे अभिप्राय को समझनेवाली हो। २. हमारे अभिप्राय को समझती हुई यह (अच्छिद्यमानया सूच्या अप: सीव्यतु) = न छिन्न होती हुई सूचीस्थानीया 'सीवनी' नाड़ी से प्रजनन लक्षण कर्म को सतत करे [षिवु तन्तुसन्ताने] [राका ह वा एतां पुरुषस्य सेवनी सीव्यति यैषा शिश्नेऽधि, पुमांसो अस्य पुत्रा जायन्ते-ऐ०३।३७]। २. यह राका हमारे लिए (वीरम्) = वीरता से युक्त, (शतदायम्) = सैकड़ों धनों का दान करनेवाले, (उक्थ्यम्) = प्रशंसनीय पुत्र को (ददातु) = दे, हमारे लिए 'प्रशस्त, उदार, वीर' सन्तानों को प्राप्त कराए।

 
Essence
पत्नी पूर्णचन्द्र के समान चमके, सब गुणों से युक्त हो। यह पति के अभिनाय को समझती हुई 'प्रशस्त, उदार, बीर' सन्तान को जन्म दे।
Subject
राका