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Atharvaveda - Mantra 3

Atharvaveda 7/46/3

118 Sukta
3 Mantra
7/46/3
Devata- सिनीवाली Rishi- अथर्वा Chhanda- त्रिष्टुप् Suktam- सिनीवाली सूक्त
Mantra with Swara
या वि॒श्पत्नीन्द्र॒मसि॑ प्र॒तीची॑ स॒हस्र॑स्तुकाभि॒यन्ती॑ दे॒वी। विष्णोः॑ पत्नि॒ तुभ्यं॑ रा॒ता ह॒वींषि॒ पतिं॑ देवि॒ राध॑से चोदयस्व ॥

या । वि॒श्पत्नी॑ । इन्द्र॑म् । असि॑ । प्र॒तीची॑ । स॒हस्र॑ऽस्तुका । अ॒भि॒ऽयन्ती॑ । दे॒वी । विष्णो॑: । प॒त्नि॒ । तुभ्य॑म् । रा॒ता । ह॒वींषि॑ । पति॑म् । दे॒वि॒ । राध॑से । चो॒द॒य॒स्व॒ ॥४८.३॥

Mantra without Swara
या विश्पत्नीन्द्रमसि प्रतीची सहस्रस्तुकाभियन्ती देवी। विष्णोः पत्नि तुभ्यं राता हवींषि पतिं देवि राधसे चोदयस्व ॥

या । विश्पत्नी । इन्द्रम् । असि । प्रतीची । सहस्रऽस्तुका । अभिऽयन्ती । देवी । विष्णो: । पत्नि । तुभ्यम् । राता । हवींषि । पतिम् । देवि । राधसे । चोदयस्व ॥४८.३॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. (या विश्पत्नी) = जो प्रजाओं का पालन करनेवाली तू (इन्द्रं प्रतीची असि) = जितेन्द्रिय पति के अभिमुख प्राप्त होनेवाली है, वह तु (सहस्त्रस्तुका) = सहस्रों स्तुतियोंवाली, खूब ही प्रभुस्तवन करनेवाली (अभियन्ती) = कर्तव्य-कर्मों की ओर गतिवाली (देवी) = प्रकाशमय जीवनवाली है। २. हे (विष्णो: पत्नि) = उदार-हृदयवाले पति की पत्नि! (तुभ्यं हवींषि राता) = तेरे लिए सब हव्य पदार्थ इस पति द्वारा प्राप्त कराये गये हैं। हे (देवि) = दिव्य गुणों को धारण करनेवाली पत्नि! तु (पतिम्) = पति को (राधसे) = सिद्धि के लिए, कार्यों में सफलता के लिए अथवा ऐश्वर्य के लिए (चोदयस्व) = प्रेरित कर।
Essence
पत्नी पति के लिए अनुकूल हो, प्रभुस्तवनपूर्वक कार्यों में प्रवृत्त होनेवाली व प्रकाशमय जीवनवाली हो। यह सदा उदार हृदय पति को ऐश्वर्य के लिए प्रेरित करनेवाली होती

 
Subject
इन्द्र प्रतीची अभियन्ती देवी