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Atharvaveda - Mantra 2

Atharvaveda 7/46/2

118 Sukta
3 Mantra
7/46/2
Devata- सिनीवाली Rishi- अथर्वा Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- सिनीवाली सूक्त
Mantra with Swara
या सु॑बा॒हुः स्व॑ङ्गु॒रिः सु॒षूमा॑ बहु॒सूव॑री। तस्यै॑ वि॒श्पत्न्यै॑ ह॒विः सि॑नीवा॒ल्यै जु॑होतन ॥

या । सु॒ऽबा॒हु: । सु॒ऽअ॒ङ्गु॒रि: । सु॒ऽसूमा॑ । ब॒हु॒ऽसूव॑री । तस्यै॑ । वि॒श्पत्न्यै॑ । ह॒वि: । सि॒नी॒वा॒ल्यै । जु॒हो॒त॒न॒ ॥४८.२॥

Mantra without Swara
या सुबाहुः स्वङ्गुरिः सुषूमा बहुसूवरी। तस्यै विश्पत्न्यै हविः सिनीवाल्यै जुहोतन ॥

या । सुऽबाहु: । सुऽअङ्गुरि: । सुऽसूमा । बहुऽसूवरी । तस्यै । विश्पत्न्यै । हवि: । सिनीवाल्यै । जुहोतन ॥४८.२॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. (या सुबाहः) = जो उत्तम भुजाओंवाली, (स्वंगुरि:) उत्तम अंगुलियोंवाली, (सुषुमा) = उत्तम योनि-[उत्पादक अंगों]-वाली और (बहुसूवरी) = बहुत सन्तानों को जन्म देनेवाली है, (तस्यै) = उस (सिनीवाल्यै) = पों में अन्न देनेवाली (विश्पल्यै) = प्रजाओं की रक्षक गृहपत्नी के लिए (हवि: जहोतन) = ग्रहण-योग्य पदार्थों को प्राप्त कराओ। २. पति को चाहिए कि वह इस बात का पूर्ण ध्यान रक्खे कि पत्नी को गृह की सुव्यवस्था के लिए किसी पदार्थ की कमी न रहे।
Essence
उत्तम पत्नी वही है जिसके अंग उत्तम हैं, जो उत्तम सन्तानों को जननेवाली है, अन्न आदि का दान व प्रजाओं का रक्षण करती है। पति को चाहिए कि इस पत्नी के लिए आवश्यक पदार्थों की कमी न होने दे।
Subject
सुषूमा बहुसूवरी
Special
मन्त्र का यह भाव भी हो सकता है कि पति ऐसी पत्नी को प्राप्त करने के लिए यज्ञशील हो।