Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 5

Atharvaveda 7/26/5

118 Sukta
8 Mantra
7/26/5
Devata- विष्णुः Rishi- मेधातिथिः Chhanda- गायत्री Suktam- विष्णु सूक्त
Mantra with Swara
त्रीणि॑ प॒दा वि च॑क्रमे॒ विष्णु॑र्गो॒पा अदा॑भ्यः। इ॒तो धर्मा॑णि धा॒रय॑न् ॥

त्रीणि॑ । प॒दा । वि । च॒क्र॒मे॒ । विष्णु॑: । गो॒पा: । अदा॑भ्य: । इ॒त: । धर्मा॑णि । धा॒रय॑न् ॥२७.५॥

Mantra without Swara
त्रीणि पदा वि चक्रमे विष्णुर्गोपा अदाभ्यः। इतो धर्माणि धारयन् ॥

त्रीणि । पदा । वि । चक्रमे । विष्णु: । गोपा: । अदाभ्य: । इत: । धर्माणि । धारयन् ॥२७.५॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
१. वे (विष्णु:) = व्यापक प्रभु (गोपा:) = गोपायिता [रक्षक] हैं, (अदाभ्यः) = अहिंस्य हैं, किसी से भी अभिभूत करने योग्य नहीं हैं। वे प्रभु (त्रीणि पदा विचक्रमे) = तीन कदमों को रखते हैं, इन लोकों का निर्माण करते हैं, धारण करते हैं और प्रलय करते हैं। २. (इत:) = [इतं गतम् अस्यास्तीति इत:] वे गतिशील प्रभु (धर्माणि) = भूतों को धारण करनेवाले 'पृथिवी,अन्तरिक्ष व युलोक' को (धारयन्) = धारण करते हैं। सब गतियों के स्रोत वे प्रभु ही हैं, वे इन सब लोकों को धारण कर रहे हैं।
Essence
वे प्रभु व्यापक, रक्षक व अहिंस्य हैं, वे इस ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति, स्थिति व प्रलय करते हैं। सब गतियों के स्रोत होते हुए वे इन लोकों को धारण कर रहे हैं।
Subject
विष्णुः गोपाः अदाभ्यः