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Atharvaveda - Mantra 2

Atharvaveda 7/22/2

118 Sukta
2 Mantra
7/22/2
Devata- ब्रध्नः, उषाः Rishi- ब्रह्मा Chhanda- त्रिपदानुष्टुप् Suktam- ज्योति सूक्त
Mantra with Swara
ब्र॒ध्नः स॒मीची॑रु॒षसः॒ समै॑रयन्। अ॑रे॒पसः॒ सचे॑तसः॒ स्वस॑रे मन्यु॒मत्त॑माश्चि॒ते गोः ॥

ब॒ध्न:। स॒मीची॑: । उ॒षस॑: । सम् । ऐ॒र॒य॒न् । अ॒रे॒पस॑: । सऽचे॑तस: । स्वस॑रे । म॒न्यु॒मत्ऽत॑मा: । चि॒ते । गो: ॥२३.२॥

Mantra without Swara
ब्रध्नः समीचीरुषसः समैरयन्। अरेपसः सचेतसः स्वसरे मन्युमत्तमाश्चिते गोः ॥

बध्न:। समीची: । उषस: । सम् । ऐरयन् । अरेपस: । सऽचेतस: । स्वसरे । मन्युमत्ऽतमा: । चिते । गो: ॥२३.२॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. (ब्रध्न:) = सबको अपने-अपने कर्मों में बाँधनेवाला सूर्य (उषस: समैरयन्) = [त्]-उषाओं को प्रेरित करे। उन उषाओं को जोकि (समीची:) = सम्यक् गतिवाली हैं, जिनमें हम अपने नित्य कर्मों को ठीक प्रकार प्रारम्भ कर देते हैं, (अरेपसः) = जो पापशून्य हैं, जिनमें प्रभुस्मरण से हम पापवृत्ति को विनष्ट करते हैं। (सचेतसः) = ज्ञान से युक्त हैं, जिनमें हम स्वाध्याय द्वारा ज्ञान का वर्धन करते हैं। २. जो उषाएँ (स्वसरे) = दिन में [अहर्नामैतत्] (मन्युमत्तमा:) = अतिशयेन दीप्तिवाली हैं और जो (गो: चिते) = ज्ञान की वाणी के चयन के लिए हैं। जिन उषाओं में हम खुब ही ज्ञान का संचय करते हैं।
Essence
प्रभुकृपा से हमारे लिए उन उषाओं का उदय हो, जिनमें हम क्रियाशील, निष्पाप, ज्ञानवाले व वेदवाणी का चयन करनेवाले बनते हैं।
Subject
कैसी उषाएँ