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Atharvaveda - Mantra 1

Atharvaveda 7/17/1

118 Sukta
4 Mantra
7/17/1
Devata- सविता Rishi- भृगुः Chhanda- त्रिपदार्षी गायत्री Suktam- द्रविणार्थप्रार्थना सूक्त
Mantra with Swara
धा॒ता द॑धातु नो र॒यिमीशा॑नो॒ जग॑त॒स्पतिः॑। स नः॑ पू॒र्णेन॑ यच्छतु ॥

धा॒ता । द॒धा॒तु॒ । न॒: । र॒यिम् । ईशा॑न: । जग॑त: । पति॑: । स: । न॒: । पू॒र्णेन॑ । य॒च्छ॒तु॒ ॥१८.१॥

Mantra without Swara
धाता दधातु नो रयिमीशानो जगतस्पतिः। स नः पूर्णेन यच्छतु ॥

धाता । दधातु । न: । रयिम् । ईशान: । जगत: । पति: । स: । न: । पूर्णेन । यच्छतु ॥१८.१॥

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Meaning
१. (धाता) = विश्व का धारक देव (न:) = हमारे लिए (रयिं दधातु) = धन को धारण करे। वे प्रभु (ईशानः) = सर्वार्थसाधन समर्थ हैं, (जगतस्पति:) = सारे ब्रह्माण्ड के स्वामी हैं। (स:) = वे (न:) = हमें (पूर्णेन) = आष्यायित, समृद्ध, धन से यच्छतु-[नियच्छतु] युक्त करें [योजयतु]।
Essence
धारक प्रभु की कृपा से हमें वह धन प्राप्त हो जो सब शक्तियों का पूरण करनेवाला बने।
Subject
रयि