Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 2

Atharvaveda 7/13/2

118 Sukta
2 Mantra
7/13/2
Devata- सूर्यः Rishi- अथर्वा Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- सविता सूक्त
Mantra with Swara
याव॑न्तो मा स॒पत्ना॑नामा॒यन्तं॑ प्रति॒पश्य॑थ। उ॒द्यन्त्सूर्य॑ इव सु॒प्तानां॑ द्विष॒तां वर्च॒ आ द॑दे ॥

याव॑न्त: । मा॒ । स॒ऽपत्ना॑नाम् । आ॒ऽयन्त॑म् । प्र॒ति॒ऽपश्य॑थ । उ॒त्ऽयन् । सूर्य॑:ऽइव । सु॒प्ताना॑म् । द्वि॒ष॒ताम् । वर्च॑: । आ । द॒दे॒ ॥१४.२॥

Mantra without Swara
यावन्तो मा सपत्नानामायन्तं प्रतिपश्यथ। उद्यन्त्सूर्य इव सुप्तानां द्विषतां वर्च आ ददे ॥

यावन्त: । मा । सऽपत्नानाम् । आऽयन्तम् । प्रतिऽपश्यथ । उत्ऽयन् । सूर्य:ऽइव । सुप्तानाम् । द्विषताम् । वर्च: । आ । ददे ॥१४.२॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
१. (सपत्नानाम्) = शत्रुओं में (यावन्त:) = जितने तुम (आयन्तम्) = आक्रमण के लिए आते हुए (मा) = मुझे (प्रतिपश्यथ) = देखते हो, (द्विषताम्) = उन सब प्रतिकूलदर्शी तुम शत्रुओं के (वर्च:) = पराक्रमरूप तेज को, इसप्रकार (आददे) = अपहत कर लेता हूँ (इव) = जैसेकि (उद्यन् सूर्य:) = उदय होता हुआ सूर्य (सुसानाम्) = सोये हुओं के तेज को छीन लेता है।
Essence
शत्रुओं के तेज को मैं इसप्रकार छीन लूँ, जैसेकि उदय होता हुआ सूर्य सोये हुओं के तेज को छीन लेता है। [अत: सूर्योदय से पूर्व जाग जाना आवश्यक ही है]।
Subject
सूर्योदय से पूर्व जाग जाना