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Atharvaveda - Mantra 1

Atharvaveda 7/113/1

118 Sukta
2 Mantra
7/113/1
Devata- तृष्टिका Rishi- भार्गवः Chhanda- विराडनुष्टुप् Suktam- शत्रुनाशन सूक्त
Mantra with Swara
तृष्टि॑के॒ तृष्ट॑वन्दन॒ उद॒मूं छि॑न्धि तृष्टिके। यथा॑ कृ॒तद्वि॒ष्टासो॒ऽमुष्मै॑ शे॒प्याव॑ते ॥

तृष्टि॑के । तृष्ट॑ऽवन्दने । उत् । अ॒मूम् । छि॒न्धि॒ । तृ॒ष्टि॒के॒ । यथा॑ । कृ॒तऽद्वि॑ष्टा । अस॑: । अ॒मुष्मै॑ । शे॒प्याऽव॑ते ॥११८.१॥

Mantra without Swara
तृष्टिके तृष्टवन्दन उदमूं छिन्धि तृष्टिके। यथा कृतद्विष्टासोऽमुष्मै शेप्यावते ॥

तृष्टिके । तृष्टऽवन्दने । उत् । अमूम् । छिन्धि । तृष्टिके । यथा । कृतऽद्विष्टा । अस: । अमुष्मै । शेप्याऽवते ॥११८.१॥

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1 Bhashyas
Meaning
१.हे बाणि! तू (तृष्टा असि) = बड़ी कर्कशा है, (तृष्टिका) = कुत्सितदाहजनिका है। (विषा) = विषरूप तू (विषातकी असि) = [विषं आतंकयति संयोजयति] विष के संयोजन से जीवन को कष्टमय बना देनेवाली हैं। २. तू हमसे (यथा) = उसी प्रकार (परिवृक्ता अससि) = छोड़ी हुई हो, (इव) = जिस प्रकार (ऋषभस्य) = शक्ति-सेचन करनेवाले वृषभ से (वशा) = वन्ध्या गौ परिवृक्ता होती है। जैसे ऋषभ से वशा गौ उपभोग्या नहीं होती, इसी प्रकार शक्तिशाली पुरुष कर्कशवाणी का परित्याग ही करता है।
Essence
कर्कशवाणी दाहजनिका है, विषरूप है, यह वन्ध्या है। शक्तिशाली पुरुष इसे सदा अपने से दूर रखता है।
Subject
कर्कशता