Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 2

Atharvaveda 7/1/2

118 Sukta
2 Mantra
7/1/2
Devata- आत्मा Rishi- अथर्वा Chhanda- विराड्जगती Suktam- आत्मा सूक्त
Mantra with Swara
स वे॑द पु॒त्रः पि॒तरं॒ स मा॒तरं॒ स सू॒नुर्भु॑व॒त्स भु॑व॒त्पुन॑र्मघः। स द्यामौ॑र्णोद॒न्तरि॑क्षं॒ स्वः स इ॒दं विश्व॑मभव॒त्स आभ॑वत् ॥

स: । वे॒द॒ । पु॒त्र: । पि॒तर॑म् । स: । मा॒तर॑म् । स: । सू॒नु: । भु॒व॒त् । स: । भु॒व॒त् । पुन॑:ऽमघ: । स: । द्याम् । औ॒र्णो॒त् । अ॒न्तरि॑क्षम् । स्व᳡: । स: । इ॒दम् । विश्व॑म् । अ॒भ॒व॒त् । स: । आ । अ॒भ॒व॒त् ॥१.२॥

Mantra without Swara
स वेद पुत्रः पितरं स मातरं स सूनुर्भुवत्स भुवत्पुनर्मघः। स द्यामौर्णोदन्तरिक्षं स्वः स इदं विश्वमभवत्स आभवत् ॥

स: । वेद । पुत्र: । पितरम् । स: । मातरम् । स: । सूनु: । भुवत् । स: । भुवत् । पुन:ऽमघ: । स: । द्याम् । और्णोत् । अन्तरिक्षम् । स्व: । स: । इदम् । विश्वम् । अभवत् । स: । आ । अभवत् ॥१.२॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
१. (स: पुत्र:) = गतमन्त्र में जिस अथर्वा की जीवनयात्रा का चित्रण किया है, वह सच्चा पुत्र [पुनाति त्रायते]-अपने जीवन को पवित्र व रक्षित करनेवाला (पितरं वेद) = अपने पिता प्रभु को जाननेवाला होता है। (सः मातरं वेद) = वह अपनी इस मातृभूत वेदवाणी को जानता है। (सः सूनुः भुवत्) = वह अपने माता-पिता का सच्चा पुत्र होता है। (पुन:) = फिर (स:) = वह (मघः भुवत्) = ऐश्वर्य का पुज बनता है अथवा ('मघ इति मखनाम') वह यज्ञशील होता है। २. (स:) = वह (द्याम्) = अपने मस्तिष्करूप धुलोक को (और्णोत) = आच्छादित करता है-उसे लोभ के आक्रमण से विनष्ट नहीं होने देता। (अन्तरिक्षम्) = वह हृदयान्तरिक्ष को आच्छादित करता है-उसे क्रोध के आक्रमण से बचाता है। परिणामत: वह (स्व:) = सुख को प्राप्त होता है। [स्वर्ग व्याप्नोति-सा०]। (स:) = वह लोभ, क्रोध आदि से ऊपर उठकर (इदं विश्वम् अभवत्) = यह सम्पूर्ण विश्व हो जाता है ("वसधैव कुटुम्बकम") = पृथिवी को ही अपना परिवार जानता है। (सः आभवत्) = अन्ततः मुक्त होकर (सर्वत:) = ब्रह्म के साथ [आ] विचरता है, ब्रह्म के साथ होता है।
Essence
हम पिता प्रभु व माता वेद को जानें। हम माता-पिता के सच्चे पुत्र बनकर यज्ञशील हों। मस्तिष्क में लोभ न आने दें, हृदय में क्रोध से दूर रहें। इसप्रकार सुख का व्यापन करें। वसुधा को ही परिवार जानें। मुक्त होकर सर्वत्र प्रभु के साथ विचरें।
Subject
सच्चा पुत्र