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Atharvaveda - Mantra 3

Atharvaveda 6/81/3

142 Sukta
3 Mantra
6/81/3
Devata- त्वष्टा Rishi- अथर्वा Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- गर्भाधान सूक्त
Mantra with Swara
यं प॑रिह॒स्तमबि॑भ॒रदि॑तिः पुत्रका॒म्या। त्वष्टा॒ तम॑स्या॒ आ ब॑ध्ना॒द्यथा॑ पु॒त्रं जना॑दिति॑ ॥

यम् । प॒रि॒ऽह॒स्तम् । अबि॑भ: । अदि॑ति: । पु॒त्र॒ऽका॒म्या । त्वष्टा॑ । तम् । अ॒स्यै॒ । आ । ब॒ध्ना॒त् । यथा॑ । पु॒त्रम् । जना॑त् । इति॑ ॥८१.३॥

Mantra without Swara
यं परिहस्तमबिभरदितिः पुत्रकाम्या। त्वष्टा तमस्या आ बध्नाद्यथा पुत्रं जनादिति ॥

यम् । परिऽहस्तम् । अबिभ: । अदिति: । पुत्रऽकाम्या । त्वष्टा । तम् । अस्यै । आ । बध्नात् । यथा । पुत्रम् । जनात् । इति ॥८१.३॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. (पुत्रकाम्या) = उत्तम सन्तान की कामनावाली (अदिति:) = अखण्डित व्रतवाली यह स्त्री (यम्) = जिस (परिहस्तम्) = हाथ का सहारा देनेवाले पुरुष को (अविभः) = धारण करती है, (त्वष्टा) = संसार का निर्माता प्रभु (तम्) = उस पुरुष को (अस्यै आबध्नात्) = इसके लिए बाँधे-इसके साथ उस पुरुष के सम्बन्ध को स्थिर करे, (यथा) = जिससे यह (पुत्रं जनात्) = उत्तम सन्तान को जन्म देनेवाली हो। (इति) = यही तो इस सम्बन्ध का उद्देश्य है।
Essence
पत्नी को पुत्र की ही कामनावाला होना चाहिए। वह व्रतमय जीवनवाली होगी तो सन्तान भी उत्तम होगी। उसे पतिव्रता होना, जिससे सन्तान भी व्रतमय जीवनवाले हों।

 
Subject
पुत्रकाम्या अदिति
Special
धन कमाने की योग्यतावाला यह पुरुष गृहस्थ में प्रवेश करता है। घर को सौभाग्य-सम्पन्न बनानेवाला [गृभ्णामि ते सौभगत्वाय हस्तम्], यह पति 'भग' कहलाता है। अगले तीन सूक्तों का ऋषि यह भग ही है।