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Atharvaveda - Mantra 2

Atharvaveda 6/81/2

142 Sukta
3 Mantra
6/81/2
Devata- आदित्यः Rishi- अथर्वा Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- गर्भाधान सूक्त
Mantra with Swara
परि॑हस्त॒ वि धा॑रय॒ योनिं॒ गर्भा॑य॒ धात॑वे। मर्या॑दे पु॒त्रमा धे॑हि॒ तं त्वमा ग॑मयागमे ॥

परि॑ऽहस्त । वि । धा॒र॒य॒ । योनि॑म् । गर्भा॑य । धात॑वे । मर्या॑दे । पु॒त्रम् । आ । धे॒हि॒ । तम् । त्वम् । आ । ग॒म॒य॒ । आ॒ऽग॒मे॒ ॥८१.२॥

Mantra without Swara
परिहस्त वि धारय योनिं गर्भाय धातवे। मर्यादे पुत्रमा धेहि तं त्वमा गमयागमे ॥

परिऽहस्त । वि । धारय । योनिम् । गर्भाय । धातवे । मर्यादे । पुत्रम् । आ । धेहि । तम् । त्वम् । आ । गमय । आऽगमे ॥८१.२॥

Meaning
१. हे (परिहस्त) = हाथ का सहारा देनेवाले पुरुष! तु (योनिम्) = सन्तान को जन्म देनेवाली इस पत्नी को (विधारय) = विशेषरूप में धारण करनेवाला हो। तू इसमें (गर्भाय धातवे) = गर्भाधान करनेवाला हो। २. तू पत्नी से यही कह कि (मर्यादे) = प्रत्येक कार्य को मर्यादा में करनेवाली तू (पुत्रम् आधेहि) = गर्भस्थ सन्तान का सब प्रकार से सम्यक् धारण कर। (तम्) = उस सन्तान को (त्वम्) = तू (आगमे) = ठीक समय पर (आगमय) = संसार में लानेवाली हो-जन्म देनेवाली हो।

 
Essence
पति को पत्नी-ग्रहण उत्तम सन्तान के लिए ही करना है। पत्नी को बड़ा मर्यादित जीवन बिताते हुए गर्भावस्था में सन्तान का सम्यक् पोषण करना है और समय पर जन्म देना है।
Subject
मर्यादा से युक्त जीवनवाली माता

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