Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 2

Atharvaveda 6/67/2

142 Sukta
3 Mantra
6/67/2
Devata- चन्द्रः, इन्द्रः Rishi- अथर्वा Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- शत्रुनाशन सूक्त
Mantra with Swara
मू॒ढा अ॒मित्रा॑श्चरताशी॒र्षाण॑ इ॒वाह॑यः। तेषां॑ वो अ॒ग्निमू॑ढाना॒मिन्द्रो॑ हन्तु॒ वरं॑वरम् ॥

मू॒ढा: । अ॒मित्रा॑: । च॒र॒त॒ । अ॒शी॒र्षाण॑:ऽइव । अह॑य: । तेषा॑म् । व॒: । अ॒ग्निऽमू॑ढानाम् ।इन्द्र॑: । ह॒न्तु॒ । वर॑म्ऽवरम् ॥६७.२॥

Mantra without Swara
मूढा अमित्राश्चरताशीर्षाण इवाहयः। तेषां वो अग्निमूढानामिन्द्रो हन्तु वरंवरम् ॥

मूढा: । अमित्रा: । चरत । अशीर्षाण:ऽइव । अहय: । तेषाम् । व: । अग्निऽमूढानाम् ।इन्द्र: । हन्तु । वरम्ऽवरम् ॥६७.२॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
१.हे (अमित्रा:) = हे शत्रुओ! (मूढाः चरत) = जय-उपाय-ज्ञानशून्य होकर तुम युद्धभूमि में इसप्रकार विचरो (इव) = जैसे (अशीर्षाण: अहयः) = अशिरस्क-छिन्नशिरस-सर्प केवल चेष्टा करते हैं, परन्तु कार्य कुछ भी नहीं कर सकते, ऐसे ही तुम भी हो जाओ। २. (अग्रिमूढानाम्) = आग्नेय अस्त्रों से मूढ बने हुए-घबराये हुए (तेषां व:) = उन तुममें से (वरं वरम्) = श्रेष्ठ-श्रेष्ठ को-मुख्य व्यक्तियों को (इन्द्रः) = यह शत्रुविद्रावक सेनापति (हन्तु) = मार डाले। मुख्यों के मारे जाने पर युद्ध समाप्त हो जाने से दूसरों को मारने की आवश्यकता ही नहीं रहती।
Essence
सब मार्गों के रुके होने पर शत्रु घबरा जाएँ। आग्नेय-अस्त्रों के प्रक्षेप से मूढ बने हुए इन शत्रुओं में से राजा चुन-चुनकर मुखियों को मारडाले, जिससे व्यर्थ का नर-संहार न करना पड़े।
Subject
प्रधान-विनाश