Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 3

Atharvaveda 6/62/3

142 Sukta
3 Mantra
6/62/3
Devata- रुद्रः Rishi- अथर्वा Chhanda- त्रिष्टुप् Suktam- पावमान सूक्त
Mantra with Swara
वै॑श्वान॒रीं वर्च॑स॒ आ र॑भध्वं शु॒द्धा भव॑न्तः॒ शुच॑यः पाव॒काः। इ॒हेड॑या सध॒मादं॒ मद॑न्तो॒ ज्योक्प॑श्येम॒ सूर्य॑मु॒च्चर॑न्तम् ॥

वै॒श्वा॒न॒रीम् । वर्च॑से । आ । र॒भ॒ध्व॒म् । शु॒ध्दा: । भव॑न्त: । शुच॑य: । पा॒व॒का: । इ॒ह । इड॑या । स॒ध॒ऽमाद॑म् । मद॑न्त: । ज्योक् । प॒श्ये॒म॒ । सूर्य॑म् । उ॒त्ऽचर॑न्तम् ॥६२.३॥

Mantra without Swara
वैश्वानरीं वर्चस आ रभध्वं शुद्धा भवन्तः शुचयः पावकाः। इहेडया सधमादं मदन्तो ज्योक्पश्येम सूर्यमुच्चरन्तम् ॥

वैश्वानरीम् । वर्चसे । आ । रभध्वम् । शुध्दा: । भवन्त: । शुचय: । पावका: । इह । इडया । सधऽमादम् । मदन्त: । ज्योक् । पश्येम । सूर्यम् । उत्ऽचरन्तम् ॥६२.३॥

Meaning
१. (वैश्वानरीम्) = प्राणिमात्र का हित करनेवाले प्रभु की वेदवाणी को (आरभध्वम्) = पढ़ना आरम्भ करो। यह वर्चसे तुम्हारे (वर्चस्) = के लिए होगी। इससे (शुद्धाः भवन्त:) = पापशून्य होते हुए (शुचय:) = ब्रह्मवर्चस् से दीस बनकर (पावका:) = औरों को भी पवित्र करनेवाले बनो। २. (इह) = यहाँ-घरों में (इडया) = इस वेदवाणी से (सधमादं मदन्तः) = आनन्दपूर्वक मिलकर बैठने के स्थानों में आनन्दित होते हुए हम (ज्योक) = दीर्घकाल तक (उच्चरन्तं सूर्यम्) = उदय होते हुए सूर्य को (पश्येम) = देखें, अर्थात् बड़े दीर्घजीवी बनें।
Essence
हम वेदवाणी के अध्ययन से पापरहित बनकर औरों को भी पवित्र करनेवाले हों। घरों में मिलकर, आनन्दपूर्वक इसका पाठ करें और दीर्घजीवी बनें।

 
Subject
शुचयः, पावका:
Special
वेदवाणी के अध्ययन के द्वारा काम-क्रोध-लोभ आदि की जिघांसावाला यह पुरुष 'द्रुह्वणः' कहलता है। यही अगले सूक्त का ऋषि है।



 

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.