Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 2

Atharvaveda 6/41/2

142 Sukta
3 Mantra
6/41/2
Devata- सरस्वती Rishi- ब्रह्मा Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- दीर्घायुप्राप्ति सूक्त
Mantra with Swara
अ॑पा॒नाय॑ व्या॒नाय॑ प्रा॒णाय॒ भूरि॑धायसे। सर॑स्वत्या उरु॒व्यचे॑ वि॒धेम॑ ह॒विषा॑ व॒यम् ॥

अ॒पा॒नाय॑ । वि॒ऽआ॒नाय॑ । प्रा॒णाय॑ । भूरि॑ऽधायसे । सर॑स्वत्यै । उ॒रु॒ऽव्यचे॑ । वि॒धेम॑ । ह॒विषा॑ । व॒यम् ॥४१.२॥

Mantra without Swara
अपानाय व्यानाय प्राणाय भूरिधायसे। सरस्वत्या उरुव्यचे विधेम हविषा वयम् ॥

अपानाय । विऽआनाय । प्राणाय । भूरिऽधायसे । सरस्वत्यै । उरुऽव्यचे । विधेम । हविषा । वयम् ॥४१.२॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
१. (अपानाय) = मुख-नासिका से बहिर् विनिर्गत वायु का फिर अन्त:प्रवेश अपानन व्यापार कहलाता है, इस अपान के लिए, (व्यानाय) = ऊर्ध्व व अधोवृत्ति के त्याग से उस वायु का शरीर में ठहरना 'व्यान' कहलाता है, उस व्यान के लिए तथा शरीरस्थ वायु का मुख-नासिका से बहिर् निर्गमन प्राण कहलाता है, उस (भूरिधायसे) = बहुत प्रकार से-खूब ही धारण करनेवाले (प्राणाय) = प्राण के लिए (वयम्) = हम (हविषा) = दानपूर्वक अदन के द्वारा (विधेम) = प्रभु का पूजन करते हैं। (सरस्वत्यै) = ज्ञान की अधिष्ठात्री देवता के लिए तथा (उरुव्यचे) = हृदय की खूब व्यापकता के लिए भी हम हवि के द्वारा प्रभुपूजन करते हैं।
Essence
यज्ञशेष के सेवन तथा प्रभुपूजन से हमारे 'प्राण, अपान, व्यान' ठीक कार्य करेंगे, हमारा ज्ञान बढ़ेगा और हृदय विशाल होगा।
Subject
सरस्वत्या-उरुव्यचे