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Atharvaveda - Mantra 1

Atharvaveda 6/28/1

142 Sukta
3 Mantra
6/28/1
Devata- यमः, निर्ऋतिः Rishi- भृगु Chhanda- त्रिष्टुप् Suktam- अरिष्टक्षयण सूक्त
Mantra with Swara
ऋ॒चा क॒पोतं॑ नुदत प्र॒णोद॒मिषं॒ मद॑न्तः॒ परि॒ गां न॑यामः। सं॑लो॒भय॑न्तो दुरि॒ता प॒दानि॑ हि॒त्वा न॒ ऊर्जं॒ प्र प॑दा॒त्पथि॑ष्ठः ॥

ऋ॒चा । क॒पोत॑म् । नु॒द॒त॒ । प्र॒ऽनोद॑म् । इष॑म्। मद॑न्त: । परि॑ । गाम् । न॒या॒म॒: । स॒म्ऽलो॒भय॑न्त: । दु॒:ऽइ॒ता । प॒दानि॑ । हि॒त्वा । न॒: । उर्ज॑म् । प्र । प॒दा॒त् ॥२८.१॥

Mantra without Swara
ऋचा कपोतं नुदत प्रणोदमिषं मदन्तः परि गां नयामः। संलोभयन्तो दुरिता पदानि हित्वा न ऊर्जं प्र पदात्पथिष्ठः ॥

ऋचा । कपोतम् । नुदत । प्रऽनोदम् । इषम्। मदन्त: । परि । गाम् । नयाम: । सम्ऽलोभयन्त: । दु:ऽइता । पदानि । हित्वा । न: । उर्जम् । प्र । पदात् ॥२८.१॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. (ऋचा) = स्तुति के द्वारा (प्रणोदम्) = प्रकृष्ट प्रेरणा प्राप्त करानेवाले (क-पोतम्) = आनन्द-पोत के समान प्रभु को नुदत-अपने हृदय में प्रेरित करो। प्रभु के सम्पर्क में मदन्त:-आनन्द का अनुभव करते हुए इषम् प्रभु-प्रेरणा को तथा गाम्-इस वेदवाणी को परिनयामः-अपने साथ परिणत करते हैं। प्रभु-प्रेरणा व प्रभुवाणी को प्राप्त करने के लिए यत्नशील होते हैं। २. इसप्रकार हम दुरिता पदानि-अशुभ गतियों को संलोभयन्त:-विनष्ट करनेवाले होते हैं। न: हमारे लिए ऊर्जम्-बल व प्राणशक्ति को हित्वा-धारण करके पथिष्ठः प्रपदात्-मार्ग पर चलानेवालों में सर्वश्रेष्ठ प्रभु हमारे आगे चले। प्रभु हमारे नेता हों। उस अग्नि के नेतृत्व में हम भी अग्नि बन पाएँ।

 
Essence
वे प्रभु आनन्द के पोत हैं। हमें प्रेरणा देनेवाले हैं। हम प्रभु-प्रेरणा व प्रभु वाणी को प्राप्त करने के लिए यत्नशील हों। अशुभ गतियों को छोड़कर बल व प्राण को धारण करके प्रभु के अनुयायी बनें। प्रभु ही हमारे नेता हों।
Subject
कपोतम्, प्रणोदम्