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Atharvaveda - Mantra 3

Atharvaveda 6/21/3

142 Sukta
3 Mantra
6/21/3
Devata- चन्द्रमाः Rishi- शन्ताति Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- केशवर्धनी ओषधि सूक्त
Mantra with Swara
रेव॑ती॒रना॑धृषः सिषा॒सवः॑ सिषासथ। उ॒त स्थ के॑श॒दृंह॑णी॒रथो॑ ह केश॒वर्ध॑नीः ॥

रेव॑ती: । अना॑धृष: । सि॒सा॒सव॑: । सि॒सा॒स॒थ॒ । उ॒त । स्थ । के॒श॒ऽदृंह॑णी:। अथो॒ इति॑ । ह॒ । के॒श॒ऽवर्ध॑नी ॥२१.३॥

Mantra without Swara
रेवतीरनाधृषः सिषासवः सिषासथ। उत स्थ केशदृंहणीरथो ह केशवर्धनीः ॥

रेवती: । अनाधृष: । सिसासव: । सिसासथ । उत । स्थ । केशऽदृंहणी:। अथो इति । ह । केशऽवर्धनी ॥२१.३॥

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Meaning
१. हे ओषधियो! तुम (रेवती) = आरोग्यरूप ऐश्वर्यशाली हो, (अनाधृष:) = रोगरूप शत्रुओं से धर्षित न होनेवाली हो, (सिषासवः) = हमारे लिए आरोग्य का सम्भजन करने की कामनावाली हो, (सिषासथ) = अत: हमारे लिए आरोग्य देने की इच्छा करो। २. इसप्रकार हमें स्वस्थ करके (उत) = निश्चय से (केशदृहणी: स्थ) = केशों को दृढ़ करनेवाली हो (अथो) = और (ह) = निश्चय से (केशवर्धनी:) = केशों को बढ़ानेवाली हो। निर्बलता में केश झड़ने लगते हैं। ये औषध हमें नीरोग बनाकर दृढ़ केशोंवाला बनाते हैं।
Essence
औषधों में अरोग्यरूप ऐश्वर्य का निवास है। इन्हें रोग पराजित नहीं कर पाते। यह रोगों को जीतने की कामनावाली है। ये हमें नीरोग बनाकर दृढ़ केशोंवाला व बढ़े हुए केशोंवाला बनाती है [गुडाकेश]।
Subject
अनाधषः सिषासवः