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Atharvaveda - Mantra 5

Atharvaveda 6/133/5

142 Sukta
5 Mantra
6/133/5
Devata- मेखला Rishi- अगस्त्य Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- मेखलाबन्धन सूक्त
Mantra with Swara
यां त्वा॒ पूर्वे॑ भूत॒कृत॒ ऋष॑यः परिबेधि॒रे। सा त्वं परि॑ ष्वजस्व॒ मां दी॑र्घायु॒त्वाय॑ मेखले ॥

याम् । त्वा॒ । पूर्वे॑ । भू॒त॒ऽकृत॑: । ऋष॑य: । प॒रि॒ऽबे॒धि॒रे । सा । त्वम् । परि॑ । स्व॒ज॒स्व॒ । माम् । दी॒र्घा॒यु॒ऽत्वाय॑ । मे॒ख॒ले॒ ॥१३३.५॥

Mantra without Swara
यां त्वा पूर्वे भूतकृत ऋषयः परिबेधिरे। सा त्वं परि ष्वजस्व मां दीर्घायुत्वाय मेखले ॥

याम् । त्वा । पूर्वे । भूतऽकृत: । ऋषय: । परिऽबेधिरे । सा । त्वम् । परि । स्वजस्व । माम् । दीर्घायुऽत्वाय । मेखले ॥१३३.५॥

Meaning
१. हे (मेखले) = मेखले! (यां त्वा) = जिस तुझे (पूर्वे) = अपना पालन व पूरण करनेवाले (भूतकृता) = यथार्थ कर्मों को करनेवाले (ऋषयः) = वासना-बिनाशक [ऋषु to kill] तत्वद्रष्टा पुरुष (परिबेधिरे) = बाँधते हैं, (सा त्वम्) = वह तु (मां परिष्वजस्व) = मेरा आलिङ्गन कर, जिससे दीर्घायुत्वाय-मैं दीर्घजीवन को प्राप्त करनेवाला बनूं।
Essence
मेखला धारण करनेवाला 'अपना पालन व पूरण करता है, यथार्थ कर्मों को करता है, वासनाओं का विनाश करता है, तत्त्वद्ष्टा बनता है, और इसप्रकार दीर्घजीवनवाला होता है।
Subject
दीर्घायुत्वाय
Special
यह दृढ़निश्चयी पुरुष वासनाओं का विनाश करके शक्तिशाली बनता है, अत: "शुक्र: ' [शुक्रं वीर्यम् अस्य अस्ति इति शुक्रः] कहलाता है। यही अगले दो सूक्तों का ऋषि है।

 

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