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Atharvaveda - Mantra 3

Atharvaveda 6/13/3

142 Sukta
3 Mantra
6/13/3
Devata- मृत्युः Rishi- अथर्वा Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- मृत्युञ्जय सूक्त
Mantra with Swara
नम॑स्ते यातु॒धाने॑भ्यो॒ नम॑स्ते भेष॒जेभ्यः॑। नम॑स्ते मृत्यो॒ मूले॑भ्यो ब्राह्म॒णेभ्य॑ इ॒दं नमः॑ ॥

नम॑: । ते॒ । या॒तु॒ऽधाने॑भ्य: । नम॑: । ते॒ । भे॒ष॒जेभ्य॑: । नम॑: । ते॒ । मृ॒त्यो॒ इति॑ । मूले॑भ्य: । ब्रा॒ह्म॒णेभ्य॑: । इ॒दम् । नम॑: ॥१३.३॥

Mantra without Swara
नमस्ते यातुधानेभ्यो नमस्ते भेषजेभ्यः। नमस्ते मृत्यो मूलेभ्यो ब्राह्मणेभ्य इदं नमः ॥

नम: । ते । यातुऽधानेभ्य: । नम: । ते । भेषजेभ्य: । नम: । ते । मृत्यो इति । मूलेभ्य: । ब्राह्मणेभ्य: । इदम् । नम: ॥१३.३॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. हे (मृत्यो) = मृत्यो! (ते) = तेरे (यातुधानेभ्यः)  पीड़ा देनेवाले रोगों के लिए (नमः) = नमस्कार हो ये हमें दूर से ही छोड़ जाएँ। इसी उद्देश्य से (ते) = तेरे दूर करने के लिए साधनभूत (भेषजेभ्य:) = औषधों के लिए हम (नमः) = नमस्कार करते हैं-इन औषधों का उचित प्रयोग करते हुए हम तुझसे अपनी रक्षा करते हैं। २. हे मृत्यो! (ते मूलेभ्यः) = तेरे मूलकारणों के लिए हम (नमः) = नमस्कार करते हैं इन्हें दूर से ही छोड़ते हैं और इन मूलकारणों के ज्ञान के लिए ही (ब्राह्मणेभ्यः इदं नमः) = ब्राह्मणों के लिए हम यह नमस्कार करते हैं। उनका आदर करते हुए तेरे कारणों को जानकर उन्हें दूर करने के लिए यत्नशील होते हैं।
Essence
मृत्यु के कारणभूत रोगों का औषध करके हम मृत्यु को दूर करें। ज्ञानियों से मृत्यु के मूलकारणों का ज्ञान प्राप्त करके उन्हें दूर करते हुए हम दीर्घजीवी बनें।
Subject
यातुधानों का भेषज
Special
रोगों को दूर करके अपना धारण करनेवाला बभ्रु-तेजस्वी वर्णवाला पिङ्गल पुरुष 'वभूपिङ्गल' अगले सूक्त का ऋषि है।