Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 3

Atharvaveda 6/129/3

142 Sukta
3 Mantra
6/129/3
Devata- भगः Rishi- अथर्वा Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- भगप्राप्ति सूक्त
Mantra with Swara
यो अ॒न्धो यः पु॑नःस॒रो भगो॑ वृ॒क्षेष्वाहि॑तः। तेन॑ मा भ॒गिनं॑ कृ॒ण्वप॑ द्रा॒न्त्वरा॑तयः ॥

य: । अ॒न्ध: । य: । पु॒न॒:ऽस॒र: । भग॑: । वृ॒क्षेषु॑ । आऽहि॑त: । तेन॑ । मा॒ । भ॒गिन॑म् । कृ॒णु॒ । अप॑ । द्रा॒न्तु॒ । अरा॑तय: ॥१२९.३॥

Mantra without Swara
यो अन्धो यः पुनःसरो भगो वृक्षेष्वाहितः। तेन मा भगिनं कृण्वप द्रान्त्वरातयः ॥

य: । अन्ध: । य: । पुन:ऽसर: । भग: । वृक्षेषु । आऽहित: । तेन । मा । भगिनम् । कृणु । अप । द्रान्तु । अरातय: ॥१२९.३॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
१. हे प्रभो! आप (मा) = मुझे (तेन) = उस ऐश्वर्य से (भगिनं कृण) = ऐश्वर्यवाला कीजिए (यः) = जोकि (अन्धः) = मेरा भोजन बनता है [अन्धः-अन्नम्], अर्थात् वह धन दीजिए जिससे मैं भोजन जुटा सकू। (यः) = जो (पुन:सरः) = फिर गतिवाला होता है, अर्थात् मेरी पेटी में बन्द न रहकर लोकहित के कार्यों में विनियुक्त होता है [स गतौ]। (यः भगः) = जो ऐश्वर्य (वृक्षेषु) = [वश्चू छेदने] वासनाओं का दहन करनेवाले व्यक्तियों में स्थापित होता है। २. हे प्रभो! आपके अनुग्रह से (अरातयः अपदान्तु) = अदानवृत्तियाँ हमसे दूर रहें। हम इन धनों को सदा देनेवाले बनें और इसप्रकार 'वृक्ष' वासनाओं का छेदन करनेवाले बनें [वश्च छेदने, वृश्चति]। ये धन हमारे लिए वृक्ष [वृक्षते to cover] न बन जाएँ, ये हमारी बुद्धि पर पर्दा न डाल दें।
Essence
प्रभु मुझे वह धन दें जिससे मैं परिवार के लिए अन्न जुटा सकूँ, लोकहित के कार्य कर सकूँ तथा वासनाओं का विच्छेद करनेवाला ही बना रहूँ।
Subject
अन्धा, पुन:सरः, वृक्षाहितः