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Atharvaveda - Mantra 4

Atharvaveda 6/128/4

142 Sukta
4 Mantra
6/128/4
Devata- सोमः, शकधूमः Rishi- अथर्वाङ्गिरा Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- राजा सूक्त
Mantra with Swara
यो नो॑ भद्रा॒हमक॑रः सा॒यं नक्त॑मथो॒ दिवा॑। तस्मै॑ ते नक्षत्रराज॒ शक॑धूम॒ सदा॒ नमः॑ ॥

य: । न॒: । भ॒द्र॒ऽअ॒हम् । अक॑र: । सा॒यम् । नक्त॑म् । अथो॒ इति॑ । दिवा॑ । तस्मै॑ । ते॒ । न॒क्ष॒त्र॒ऽरा॒ज॒ । शक॑ऽधूम । सदा॑ । नम॑: ॥१२८.४॥

Mantra without Swara
यो नो भद्राहमकरः सायं नक्तमथो दिवा। तस्मै ते नक्षत्रराज शकधूम सदा नमः ॥

य: । न: । भद्रऽअहम् । अकर: । सायम् । नक्तम् । अथो इति । दिवा । तस्मै । ते । नक्षत्रऽराज । शकऽधूम । सदा । नम: ॥१२८.४॥

Meaning
१. हे (शकधूम) = शक्ति के द्वारा शत्रुओं को कम्पित करनेवाले (नक्षत्रराज) = अपना त्राण स्वयं न कर सकनेवाली प्रजाओं के शासक। (य:) = जो आप (नः) = हमारे लिए (सायं नक्तम् अथो दिवा) = सायं, रात्रि और दिन में (भद्राहम् अकर:) = कल्याण करते हैं (तस्मै ते) = उस आपके लिए हम (सदा नमः) = सदा नमस्कार करते हैं।
Essence
राजा प्रजाओं का रक्षण करता है। प्रजा को चाहिए कि इस राजा का उचित आदर करे।
Subject
शकधूम को प्रणाम
Special
सुरक्षित राष्ट्र में स्वस्थ वृत्ति से आगे बढ़नेवाला यह स्थिर चित्तवाला [अथर्वा] तथा अङ्ग-प्रत्यङ्ग में शक्ति के रसवाला [अंगिराः] 'अथर्वाङ्गिराः' अगले चार सूक्तों का ऋषि है।

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