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Atharvaveda - Mantra 3

Atharvaveda 6/121/3

142 Sukta
4 Mantra
6/121/3
Devata- तारके Rishi- कौशिक Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- सुकृतलोकप्राप्ति सूक्त
Mantra with Swara
उद॑गातां॒ भग॑वती वि॒चृतौ॒ नाम॒ तार॑के। प्रेहामृत॑स्य यच्छतां॒ प्रैतु॑ बद्धक॒मोच॑नम् ॥

उत् । अ॒गा॒ता॒म् । भग॑वती॒ इति॒ भग॑ऽवती । वि॒ऽचृतौ॑ । नाम॑ । तार॑के॒‍ इति॑ । प्र । इ॒ह । अ॒मृत॑स्य । य॒च्छ॒ता॒म् । प्र । ए॒तु॒ । ब॒ध्द॒क॒ऽमोच॑नम् ॥१२१.३॥

Mantra without Swara
उदगातां भगवती विचृतौ नाम तारके। प्रेहामृतस्य यच्छतां प्रैतु बद्धकमोचनम् ॥

उत् । अगाताम् । भगवती इति भगऽवती । विऽचृतौ । नाम । तारके‍ इति । प्र । इह । अमृतस्य । यच्छताम् । प्र । एतु । बध्दकऽमोचनम् ॥१२१.३॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. हमारे जीवनों में (भगवती) = उत्तम सौजन्य को प्राप्त करानेवाली (विचूतौ नाम) = पाप-बन्धन को विच्छिन्न करनेवाली (तारके) = पराविद्या व अपराविद्यारूप ताराएँ उदगाताम् उदित हों। ये तारे (इह) = इस जीवन में हमें (अमृतस्य प्रयच्छताम्) = अमृत प्रदान करें। अपारविद्या से हम अभ्युदय को प्राप्त करते हुए दरिद्रता व रोगादिरूप मृत्युओं से बचें तथा पराविद्या से हम निष्काम कर्म करते हुए जन्म-मरण के चक्र से ऊपर उठ पाएँ-नि:श्रेयस को प्राप्त करनेवाले हों। हमें (बद्धकमोचनं प्र एतु) = कुत्सित बन्धनों से मोक्ष प्राप्त हो। हम विषय-वासनाओं के बन्धन से ऊपर उठें।
Essence
हम पराविद्या व अपराविद्या के नक्षत्रों को अपने मस्तिष्क-गगन में उदित करते हुए बन्धनों से मुक्त हों और अमृतत्व को प्राप्त करें।


 
Subject
विचूतौ नाम तारके