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Atharvaveda - Mantra 3

Atharvaveda 6/114/3

142 Sukta
3 Mantra
6/114/3
Devata- विश्वे देवाः Rishi- ब्रह्मा Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- उन्मोचन सूक्त
Mantra with Swara
मेद॑स्वता॒ यज॑मानाः स्रु॒चाज्या॑नि॒ जुह्व॑तः। अ॑का॒मा वि॑श्वे वो देवाः॒ शिक्ष॑न्तो॒ नोप॑ शेकिम ॥

मेद॑स्वता । यज॑माना: । स्रु॒चा । आज्या॑नि । जुह्व॑त: । अ॒का॒मा: । वि॒श्वे॒ । व॒: । दे॒वा॒: । शिक्ष॑न्त: । न । उप॑ । शे॒कि॒म॒ ॥११४.३॥

Mantra without Swara
मेदस्वता यजमानाः स्रुचाज्यानि जुह्वतः। अकामा विश्वे वो देवाः शिक्षन्तो नोप शेकिम ॥

मेदस्वता । यजमाना: । स्रुचा । आज्यानि । जुह्वत: । अकामा: । विश्वे । व: । देवा: । शिक्षन्त: । न । उप । शेकिम ॥११४.३॥

Meaning
१. प्रतिदिन काम में आनेवाला चम्मच चिकनाईवाला हो जाता है। इस चम्मच को यहाँ 'मेदस्वान्'-मेदसवाला कहा है। (मेदस्वता) = इस चिकनाईवाले (स्त्रुचा) = चम्मच में (आज्यानि) = घृतों को जहतः करते हुए (यजमाना:) = यज्ञशील, (अकामा:) = लौकिक फलों की कामना न करनेवाले कर्तव्य-बुद्धि से यज्ञों को करनेवाले हे (विश्वेदेवा:) = देववृत्ति के सब मनुष्यो! हम भी (वः) = आपके हैं। हमें भी तो आपने अपनी ही भांति यज्ञशील बनाना था। हम (शिक्षन्तः) = यज्ञ करना चाहते हुए भी, न जाने किस अशुभ प्रभाव के कारण न (उपशेकिम) = यज्ञों को करने में समर्थ नहीं हो पाते। आप उस वृत्ति से हमें बचाइए और यज्ञ में प्रवृत्त कीजिए।
Essence
देववृत्तिवाले पुरुषों की भाँति हम भी यज्ञशील बनें। सदा यज्ञ करने से हमारे चम्मच घृत की चिकनाईवाले हो जाएँ।
Subject
मेदस्वता स्त्रुचा

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