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Atharvaveda - Mantra 2

Atharvaveda 6/109/2

142 Sukta
3 Mantra
6/109/2
Devata- भैषज्यम् Rishi- अथर्वा Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- पिप्पलीभैषज्य सूक्त
Mantra with Swara
पि॑प्प॒ल्यः सम॑वदन्ताय॒तीर्जन॑ना॒दधि॑। यं जी॒वम॒श्नवा॑महै॒ न स रि॑ष्याति॒ पूरु॑षः ॥

पि॒प्प॒ल्य᳡: । सम् । अ॒व॒द॒न्त॒। आ॒ऽय॒ती: । जन॑नात् । अधि॑ । यम् । जी॒वम् । अ॒श्नवा॑महै । न । स: । रि॒ष्या॒ति॒ । पुरु॑ष: ॥१०९.२॥

Mantra without Swara
पिप्पल्यः समवदन्तायतीर्जननादधि। यं जीवमश्नवामहै न स रिष्याति पूरुषः ॥

पिप्पल्य: । सम् । अवदन्त। आऽयती: । जननात् । अधि । यम् । जीवम् । अश्नवामहै । न । स: । रिष्याति । पुरुष: ॥१०९.२॥

Meaning
१. (पिप्पल्य:) = पिप्पलियाँ (जननात् अधि) = जन्म से ही (आयती:) = आती हुई (सम् अवदन्त) = परस्पर बात करती हैं कि (यं जीवम्) = जिस जीव को (अश्नवामहै) = हम औषधरूपेण प्र.स होती हैं, (स:) = वह (पूरुषः) = पुरुष (न रिष्याति) = नष्ट नहीं होता-हिसित नहीं होता।
Essence
पिप्पलियाँ जब अंकुरित होकर भूमि से ऊपर आती है तब मानो परस्पर बात करती हैं कि हमें औषधरूपेण प्राप्त करनेवाला पुरुष कभी हिंसित नहीं होता।




 
Subject
पिप्पलियों का संवाद

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