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Atharvaveda - Mantra 1

Atharvaveda 6/105/1

142 Sukta
3 Mantra
6/105/1
Devata- कासा Rishi- उन्मोचन Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- कासशमन सूक्त
Mantra with Swara
यथा॒ मनो॑ मनस्के॒तैः प॑रा॒पत॑त्याशु॒मत्। ए॒वा त्वं का॑से॒ प्र प॑त॒ मन॒सोऽनु॑ प्रवा॒य्यम् ॥

यथा॑ । मन॑: । म॒न॒:ऽके॒तै: । प॒रा॒ऽपत॑ति । आ॒शु॒ऽमत् । ए॒व । त्वम् । का॒से॒ । प्र । प॒त॒ । मन॑स: । अनु॑ । प्र॒ऽवा॒य्य᳡म् ॥१०५.१॥

Mantra without Swara
यथा मनो मनस्केतैः परापतत्याशुमत्। एवा त्वं कासे प्र पत मनसोऽनु प्रवाय्यम् ॥

यथा । मन: । मन:ऽकेतै: । पराऽपतति । आशुऽमत् । एव । त्वम् । कासे । प्र । पत । मनस: । अनु । प्रऽवाय्यम् ॥१०५.१॥

Meaning
१. (यथा) = जैसे (मन:) = मन (मनस्केतै:) = [मनसा बुद्धिवृत्या] बुद्धिवृत्ति से ज्ञायमान विषयों के साथ (आशुमत्) = शीघ्रता से युक्त हुआ-हुआ (परापतति) = दूर-दूर जाता है (एव) = इसीप्रकार हे (कासे) = श्लेष्मरोग! (त्वम्) = तू (मनसः प्रवाय्यम्) = मन की प्रगन्तव्य अवधि को (अनु प्रपत) = लक्ष्य करके गतिवाला हो-तू मनोवेग से इस पुरुष से निकलकर दूर देश में चला जा।
Essence
जैसे मन शीघ्रता से दूर देश में चला जाता है, उसी प्रकार यह खाँसी हमें छोड़कर दूर चली जाए।
Subject
कासा का दूर गमन [यथा मनः]

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