Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 3

Atharvaveda 5/9/3

31 Sukta
8 Mantra
5/9/3
Devata- वास्तोष्पतिः Rishi- ब्रह्मा Chhanda- दैवी जगती Suktam- आत्मा सूक्त
Mantra with Swara
अ॒न्तरि॑क्षाय॒ स्वाहा॑ ॥

अ॒न्तरि॑क्षाय । स्वाहा॑ ॥९.३॥

Mantra without Swara
अन्तरिक्षाय स्वाहा ॥

अन्तरिक्षाय । स्वाहा ॥९.३॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
अन्तरिक्षाय-हदयरूप अन्तरिक्ष की पवित्रता के लिए आपके प्रति स्वाहा-अपना अर्पण करता हूँ।
Essence
ब्रह्मा वही है जिसने त्रिलोकी का विजय करके अपने को ब्रह्मलोक की प्राप्ति के योग्य बनाया है। तीनों लोकों की उन्नति समानरूप से अपेक्षित है। यही भाव क्रम-विपर्यय से सूचित किया गया है।
Subject
त्रिलोकी का विजेता 'ब्रह्मा'