Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 2

Atharvaveda 5/9/2

31 Sukta
8 Mantra
5/9/2
Devata- वास्तोष्पतिः Rishi- ब्रह्मा Chhanda- दैवी त्रिष्टुप् Suktam- आत्मा सूक्त
Mantra with Swara
पृ॒थि॒व्यै स्वाहा॑ ॥२॥

पृ॒थि॒व्यै । स्वाहा॑ ॥९.२॥

Mantra without Swara
पृथिव्यै स्वाहा ॥

पृथिव्यै । स्वाहा ॥९.२॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
पृथिव्यै-इस पृथिवीरूप शरीर के लिए स्वाहा-आपके प्रति अपना अर्पण करता हूँ।
Essence
ब्रह्मा वही है जिसने त्रिलोकी का विजय करके अपने को ब्रह्मलोक की प्राप्ति के योग्य बनाया है। तीनों लोकों की उन्नति समानरूप से अपेक्षित है। यही भाव क्रम-विपर्यय से सूचित किया गया है।
Subject
त्रिलोकी का विजेता 'ब्रह्मा'