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Atharvaveda - Mantra 10

Atharvaveda 5/31/10

31 Sukta
12 Mantra
5/31/10
Devata- कृत्याप्रतिहरणम् Rishi- शुक्रः Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- कृत्यापरिहरण सूक्त
Mantra with Swara
अप॑थे॒ना ज॑भारैणां॒ तां प॒थेतः प्र हि॑ण्मसि। अधी॑रो मर्या॒धीरे॑भ्यः॒ सं ज॑भा॒राचि॑त्त्या ॥

अप॑थेन । आ । ज॒भा॒र॒ । ए॒ना॒म् । ताम् । प॒था । इ॒त: । प्र । हि॒ण्म॒सि॒ । अधी॑र: । म॒र्या॒ऽधीरे॑भ्य: । सम् । ज॒भा॒र॒ ।अचि॑त्त्या ॥३१.१०॥

Mantra without Swara
अपथेना जभारैणां तां पथेतः प्र हिण्मसि। अधीरो मर्याधीरेभ्यः सं जभाराचित्त्या ॥

अपथेन । आ । जभार । एनाम् । ताम् । पथा । इत: । प्र । हिण्मसि । अधीर: । मर्याऽधीरेभ्य: । सम् । जभार ।अचित्त्या ॥३१.१०॥

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Meaning
१. (अपथेन) = बुरे मार्ग से (एनाम्) = इस हिंसक को एक (अधीर:) = नासमझ पुरुष (आजभार) = यहाँ राष्ट्र में ले-आया (ताम्) = उस हिंसा को (पथा) = मार्ग पर चलने के द्वारा (इत:) = यहाँ से-राष्ट्र से (प्र हिण्मसि) = दूर भगाते हैं। अनीति के कारण उपस्थित हिंसा को नीति के द्वारा दूर करते हैं। २. (अधीर:) = मूर्ख मनुष्य (अचित्त्या) = नासमझी से (मर्याधीरेभ्य:) = मर्यादा धारण करनेवाले पुरुषों के लिए (सं जभार) = उस हिंसा को ला-पटकता है।
Essence
अधीर पुरुषों से नासमझी के कारण राष्ट्र में अनीति से हिंसा की स्थिति प्राप्त कराई जाती है, उसे नीति के द्वारा दूर करने का प्रयत्न करना चाहिए।
Subject
अधीरः धीरेभ्यः