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Atharvaveda - Mantra 9

Atharvaveda 5/3/9

31 Sukta
11 Mantra
5/3/9
Devata- इन्द्रः Rishi- बृहद्दिवोऽथर्वा Chhanda- त्रिष्टुप् Suktam- विजयप्रार्थना सूक्त
Mantra with Swara
धा॒ता वि॑धा॒ता भुव॑नस्य॒ यस्पति॑र्दे॒वः स॑वि॒ताभि॑मातिषा॒हः। आ॑दि॒त्या रु॒द्रा अ॒श्विनो॒भा दे॒वाः पा॑न्तु॒ यज॑मानं निरृ॒थात् ॥

धा॒ता । वि॒ऽधा॒ता । भुव॑नस्य । य: । पति॑: । दे॒व: । स॒वि॒ता । अ॒भि॒मा॒ति॒ऽस॒ह:। आ॒दि॒त्या: । रु॒द्रा: । अ॒श्विना॑ । उ॒भा । दे॒वा: । पा॒न्तु॒ । यज॑मानम् । नि॒:ऽऋ॒थात् ॥३.९॥

Mantra without Swara
धाता विधाता भुवनस्य यस्पतिर्देवः सविताभिमातिषाहः। आदित्या रुद्रा अश्विनोभा देवाः पान्तु यजमानं निरृथात् ॥

धाता । विऽधाता । भुवनस्य । य: । पति: । देव: । सविता । अभिमातिऽसह:। आदित्या: । रुद्रा: । अश्विना । उभा । देवा: । पान्तु । यजमानम् । नि:ऽऋथात् ॥३.९॥

Meaning
१. (धाता) = वह धारण करनेवाला (विधाता) = सृष्टि का रचयिता (सविता देव:) = सबका प्रेरक प्रकाशमय प्रभु (अभिमातिषाहः) = हमारे सब अभिमानी शत्रुओं का पराभव करनेवाले हैं। प्रभु वे हैं, (यः) = जो (भुवनस्य पतिः) = सारे ब्रह्माण्ड के स्वामी हैं। सारे ब्रह्माण्ड का धारण व रक्षण करनेवाले वे प्रभु हमारे शत्रुओं का विनाश करके हमारा भी धारण करते हैं । २. (आदित्या:) = आयुष्य का आदान करनेवाले ये बारह मास (रुद्रा:) = शरीरस्थ प्राण [रोगों को दूर भगानेवाले ये प्राण] (उभा अश्विना) = दोनों धुलोक व पृथिवीलोक [इमे ह वै द्यावापृथिवी प्रत्यक्षमश्विनौ-शत० ४.२.५.१६] तथा (देवा:) = अन्य सब प्राकृतिक शक्तियों (यजमानम्) = इस यज्ञशील पुरुष को (निर्ऋथात्) = दुर्गति व विनाश से पान्तु-बचाएँ।
Essence
उत्तम प्रेरणा प्राप्त करते हुए प्रभु हम यज्ञशील पुरुषों को यज्ञों के कर्तृत्व के अहंकार से ऊपर उठाएं। प्रभु का बनाया हुआ यह सारा संसार हमें विनाश से बचाए।
Subject
यजमान का रक्षण धाता

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