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Atharvaveda - Mantra 9

Atharvaveda 5/27/9

31 Sukta
12 Mantra
5/27/9
Devata- इळा, सरस्वती, भारती Rishi- ब्रह्मा Chhanda- षट्पदा अनुष्टुब्गर्भा परातिजगती Suktam- अग्नि सूक्त
Mantra with Swara
दैवा॒ होता॑र ऊ॒र्ध्वम॑ध्व॒रं नो॒ऽग्नेर्जि॒ह्वया॒भि गृ॑णत गृ॒णता॑ नः॒ स्वि॑ष्टये। ति॒स्रो दे॒वीर्ब॒र्हिरेदं स॑दन्ता॒मिडा॒ सर॑स्वती म॒ही भार॑ती गृणा॒ना ॥

दैवा॑: । होता॑र: । ऊ॒र्ध्वम्‌ । अ॒ध्व॒रम् । न॒: । अ॒ग्ने: । जि॒ह्वया॑ । अ॒भि ।गृ॒ण॒त॒ । गृ॒णत॑ । न॒: । सुऽइ॑ष्टये । ति॒स्र: । दे॒वी: । ब॒र्हि: । आ । इ॒दम् । स॒द॒न्ता॒म् । इडा॑ । सर॑स्वती। म॒ही । भार॑ती । गृ॒णा॒ना ॥२७.९॥

Mantra without Swara
दैवा होतार ऊर्ध्वमध्वरं नोऽग्नेर्जिह्वयाभि गृणत गृणता नः स्विष्टये। तिस्रो देवीर्बर्हिरेदं सदन्तामिडा सरस्वती मही भारती गृणाना ॥

दैवा: । होतार: । ऊर्ध्वम्‌ । अध्वरम् । न: । अग्ने: । जिह्वया । अभि ।गृणत । गृणत । न: । सुऽइष्टये । तिस्र: । देवी: । बर्हि: । आ । इदम् । सदन्ताम् । इडा । सरस्वती। मही । भारती । गृणाना ॥२७.९॥

Meaning
१. (दैवा:) = उस देव [प्रभु] से शरीर में स्थापित किये गये (होतार:) = जीवन-यज्ञ को चलानेवाले हे प्राणो! (न:) = हमारे (अध्वरम् ऊर्ध्वम्) = जीवन-यज्ञ को उत्कृष्ट बनाओ। उस (अग्ने:) = अग्रणी प्रभु की-प्रभु से दी गई (जिहया) = जिला से (अभिगृणत) = प्रात:-सायं प्रभु के नामों का उच्चरण करो। (न: स्विष्टये) = हमारी स्विष्टि के लिए उत्तम अभीष्टों की प्राप्ति के लिए गणत-प्रभु का स्तवन करो। यह प्रभु-स्तवन हमें उत्तम प्रेरणा प्राप्त कराता हुआ अधिक-और-अधिक उन्नत करता है। २. (इडा) = प्रशस्त अन्न [इडा इति अन्ननाम निघण्टौ], (सरस्वती) = ज्ञान की अधिष्ठात्री देवता तथा (भारती) = हमारा समुचित भरण करनेवाली (मही) = पूजा की वृत्ति [मह पूजायाम्] ये (तिस्त्रः) = तीनों (देवी:) = दिव्यताएँ (इदं बर्हिः) = इस वासनाशून्य हृदय में (आसदन्ताम्) - आसीन हों। ये सब दिव्य वस्तुएँ व गुण एक-एक करके (गृणाना) = प्रभु का ही नामोच्चरण करनेवाली हों। प्रशस्त अन्न हमें सात्विक वृत्तिवाला बनाकर प्रभु नामोच्चारण कराये, ज्ञान हमें प्रभु नामोच्चरण में प्रवृत्त करे, स्तुति में हम प्रभु-नामोच्चारण करें।
Essence
प्रभु से शरीर में स्थापित किये गये प्राण हमें यज्ञों में प्रवृत्त करें और जिह से हम प्रभु के नामों का उच्चारण करें। 'प्रशस्त अन्न का सेवन, विद्या का आराधन व प्रभुस्तवन' ये सब हमें प्रभु नामोच्चारण में प्रवृत्त करें।
Subject
प्रभु-नामोच्चारण

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