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Atharvaveda - Mantra 4

Atharvaveda 5/27/4

31 Sukta
12 Mantra
5/27/4
Devata- इळा, सरस्वती, भारती Rishi- ब्रह्मा Chhanda- द्विपदा साम्नी भुरिग्बृहती Suktam- अग्नि सूक्त
Mantra with Swara
अच्छा॒यमे॑ति॒ शव॑सा घृ॒ता चि॒दीडा॑नो॒ वह्नि॒र्नम॑सा ॥

अच्छ॑ । अ॒यम् । ए॒ति॒। शव॑सा । घृ॒ता । चि॒त् । ईडा॑न: । वह्नि॑ । नम॑सा ॥२७.४॥

Mantra without Swara
अच्छायमेति शवसा घृता चिदीडानो वह्निर्नमसा ॥

अच्छ । अयम् । एति। शवसा । घृता । चित् । ईडान: । वह्नि । नमसा ॥२७.४॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. (अयम्) = यह ब्रह्मा (शवसा) = बल से तथा (घृता) = ज्ञान-दीप्ति से (चित्) = निश्चयपूर्वक (ईडानः) = स्तुति करता हुआ तथा (नमसा वह्निः) = नमन के साथ सब कर्त्तव्यकर्मों का वहन करता हुआ (अच्छ एति) = प्रभु की ओर गति करता है।
Essence
ब्रह्मा वह है, जिसके शरीर में बल है [शवस्], मस्तिष्क में ज्ञानदीति है [घृत] तथा मन में निरभिमानता है [नमस्]। इनसे ही यह प्रभु का पूजन करता है और उसे प्राप्त करता है।
Subject
शवसा, घृता, नमसा