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Atharvaveda - Mantra 3

Atharvaveda 5/27/3

31 Sukta
12 Mantra
5/27/3
Devata- इळा, सरस्वती, भारती Rishi- ब्रह्मा Chhanda- द्विपदार्ची बृहती Suktam- अग्नि सूक्त
Mantra with Swara
मध्वा॑ य॒ज्ञं न॑क्षति प्रैणा॒नो नरा॒शंसो॑ अ॒ग्निः सु॒कृद्दे॒वः स॑वि॒ता वि॒श्ववा॑रः ॥

मध्वा॑ । य॒ज्ञम् । न॒क्ष॒ति॒ । प्रै॒णा॒न: । नरा॒शंस॑: । अ॒ग्नि: । सु॒ऽकृत् । दे॒व: । स॒वि॒ता । वि॒श्वऽवा॑र: ॥२७.३॥

Mantra without Swara
मध्वा यज्ञं नक्षति प्रैणानो नराशंसो अग्निः सुकृद्देवः सविता विश्ववारः ॥

मध्वा । यज्ञम् । नक्षति । प्रैणान: । नराशंस: । अग्नि: । सुऽकृत् । देव: । सविता । विश्वऽवार: ॥२७.३॥

Meaning
१. (मध्वा) = माधुर्य के साथ (यहं प्रैणान:) = यज्ञ को अपने में प्रेरित करता हुआ (नक्षति) = गति करता है, (नराशंस:) = नरों का शंसनीय बनता है, (अग्नि:) = अग्रणी होता है। २. (सुकृत्) = उत्तम कर्मों को करनेवाला (देव:) = दिव्य गुणों का पुञ्ज, (सविता) = उत्पादक, निर्माण के कार्य करनेवाला, (विश्ववार:) = सब वरणीय धनोंवाला होता है।
Essence
ब्रह्मा के जीवन में माधुर्य के साथ यज्ञ, लोकप्रियता, आगे बढ़ना, पुण्य, दिव्यता, उत्पादकता तथा सब बरणीय धनों की प्राप्ति होती है।
Subject
सुकृत, देवः सविता

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