Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 8

Atharvaveda 5/26/8

31 Sukta
12 Mantra
5/26/8
Devata- त्वष्टा Rishi- ब्रह्मा Chhanda- द्विपदा प्राजापत्या बृहती Suktam- नवशाला सूक्त
Mantra with Swara
त्वष्टा॑ युनक्तु बहु॒धा नु रू॒पा अ॒स्मिन्य॒ज्ञे यु॑नक्तु सु॒युजः॒ स्वाहा॑ ॥

त्वष्टा॑ । यु॒न॒क्तु॒ । ब॒हु॒ऽधा । नु । रू॒पा: । अ॒स्मिन् । य॒ज्ञे । सु॒ऽयुज॑: । स्वाहा॑॥२६.८॥

Mantra without Swara
त्वष्टा युनक्तु बहुधा नु रूपा अस्मिन्यज्ञे युनक्तु सुयुजः स्वाहा ॥

त्वष्टा । युनक्तु । बहुऽधा । नु । रूपा: । अस्मिन् । यज्ञे । सुऽयुज: । स्वाहा॥२६.८॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
१. (सयुज:) = हमें उत्तम कर्मों में लगानेवाला (त्वष्टा) = वह निर्माता व ज्ञानदीस प्रभु [त्विषेर्वा] (नु) = अब (अस्मिन् यज्ञे) = इस जीवन-यज्ञ में (बहुधा) = अनेक प्रकार से (रूपा:) = पदार्थों के निरूपणों को अथवा उत्तम रूपों को (युनत्तु) = युक्त करे। (स्वाहा) = उस त्वष्टा के प्रति हम अपना अर्पण करें।
Essence
हम सब बातों का ठीक से निरूपण करके कर्तव्यकर्मों में प्रवृत्त हों।
Subject
विचारपूर्वक कर्म