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Atharvaveda - Mantra 7

Atharvaveda 5/26/7

31 Sukta
12 Mantra
5/26/7
Devata- विष्णुः Rishi- ब्रह्मा Chhanda- द्विपदा प्राजापत्या बृहती Suktam- नवशाला सूक्त
Mantra with Swara
विष्णु॑र्युनक्तु बहु॒धा तपां॑स्य॒स्मिन्य॒ज्ञे सु॒युजः॒ स्वाहा॑ ॥

विष्णु॑: । यु॒न॒क्तु॒ । ब॒हु॒ऽधा । तपा॑सि । अ॒स्मिन् । य॒ज्ञे । सु॒ऽयुज॑: । स्वाहा॑ ॥२६.७॥

Mantra without Swara
विष्णुर्युनक्तु बहुधा तपांस्यस्मिन्यज्ञे सुयुजः स्वाहा ॥

विष्णु: । युनक्तु । बहुऽधा । तपासि । अस्मिन् । यज्ञे । सुऽयुज: । स्वाहा ॥२६.७॥

Meaning
१. (सुयुज:) = हमें उत्तम कर्मों में लगानेवाला (विष्णु:) = वह सर्वव्यापक प्रभु (अस्मिन् यज्ञे) = इस जीवन-यज्ञ में (बहुधा) = बहुत प्रकार से (तपांसि युनत्तु) = तपों को हमारे साथ जोड़े। (स्वाहा) = हम उस प्रभु के प्रति अपना अर्पण करें।
Essence
प्रभुकृपा से हमारा जीवन तपोमय हो। 'ऋतं तपः, सत्यं तपः, शान्तं तपः, शमस्तपः, दमस्तपः' के अनुसार हम 'ऋत, सत्य, शान्त, शम, दम' आदि तपों में लगे रहें।



 

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