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Atharvaveda - Mantra 2

Atharvaveda 5/26/2

31 Sukta
12 Mantra
5/26/2
Devata- सविता Rishi- ब्रह्मा Chhanda- द्विपदा प्राजापत्या बृहती Suktam- नवशाला सूक्त
Mantra with Swara
यु॒नक्तु॑ दे॒वः स॑वि॒ता प्र॑जा॒नन्न॒स्मिन्य॒ज्ञे म॑हि॒षः स्वाहा॑ ॥

यु॒नक्तु॑ । दे॒व: । स॒वि॒ता । प्र॒ऽजा॒नन् । अ॒स्मिन् । य॒ज्ञे । म॒हि॒ष: । स्वाहा॑ ॥२६.२॥

Mantra without Swara
युनक्तु देवः सविता प्रजानन्नस्मिन्यज्ञे महिषः स्वाहा ॥

युनक्तु । देव: । सविता । प्रऽजानन् । अस्मिन् । यज्ञे । महिष: । स्वाहा ॥२६.२॥

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Meaning
१. वह (सविता देव:) = सबका प्रेरक, दिव्य गुणों का पुञ्ज प्रभु (प्रजानन्) = हमारी स्थिति को ठीक-ठीक जानता हुआ (युनक्तु) = हमें योगयुक्त करे-समाहित करे। २. (अस्मिन् यज्ञे) = इस जीवन-यज्ञ में (महिषः) = वह पूजनीय प्रभु ही (स्वाहा) = अर्पणीय है। हम प्रभु के प्रति अपना अर्पण करके जीवन-यज्ञ को सुन्दर बनाएँ।
Essence
हमारा जीवन ध्यान तथा प्रभुपूजनवाला हो।
Subject
ध्यान+प्रभुपूजन