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Atharvaveda - Mantra 10

Atharvaveda 5/26/10

31 Sukta
12 Mantra
5/26/10
Devata- सोमः Rishi- ब्रह्मा Chhanda- द्विपदा प्राजापत्या बृहती Suktam- नवशाला सूक्त
Mantra with Swara
सोमो॑ युनक्तु बहु॒धा पयां॑स्य॒स्मिन्य॒ज्ञे सु॒युजः॒ स्वाहा॑ ॥

सोम॑: । यु॒न॒क्तु॒ । ब॒हु॒ऽधा। पयां॑सि । अ॒स्मिन् । य॒ज्ञे । सु॒ऽयुज॑: । स्वाहा॑ ॥२६.१०॥

Mantra without Swara
सोमो युनक्तु बहुधा पयांस्यस्मिन्यज्ञे सुयुजः स्वाहा ॥

सोम: । युनक्तु । बहुऽधा। पयांसि । अस्मिन् । यज्ञे । सुऽयुज: । स्वाहा ॥२६.१०॥

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Meaning
१. (सुयुज:) = उत्तम कर्मों में व्याप्त करनेवाला (सोमः) = शान्त प्रभु (अस्मिन् यज्ञे) = इस जीवन यज्ञ में बहुधा बहुत प्रकार से (पांसि) = [अन्नानि-नि० २.७] आप्यायन के साधनभूत अन्नों को (युनक्तु) = हमारे साथ जोड़े। (स्वाहा) = उस प्रभु के प्रति मैं अपना अर्पण करता हूँ।
Essence
उत्तम अन्नों का प्रयोग करते हुए हम इस जीवन-यज्ञ में अपना आप्यायन करें।

 
Subject
पयांसि