Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 9

Atharvaveda 5/25/9

31 Sukta
13 Mantra
5/25/9
Devata- योनिः, गर्भः Rishi- ब्रह्मा Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- गर्भाधान सूक्त
Mantra with Swara
वि जि॑हीष्व बार्हत्सामे॒ गर्भ॑स्ते॒ योनि॒मा श॑याम्। अदु॑ष्टे दे॒वाः पु॒त्रं सो॑म॒पा उ॑भया॒विन॑म् ॥

वि । जि॒ही॒ष्व॒ । बा॒र्ह॒त्ऽसा॒मे॒ । गर्भ॑:। ते॒ । योनि॑म् । आ । श॒या॒म् । अदु॑: । ते॒ । दे॒वा: । पु॒त्रम् । सो॒म॒ऽपा: । उ॒भ॒या॒विन॑म् ॥२५.९॥

Mantra without Swara
वि जिहीष्व बार्हत्सामे गर्भस्ते योनिमा शयाम्। अदुष्टे देवाः पुत्रं सोमपा उभयाविनम् ॥

वि । जिहीष्व । बार्हत्ऽसामे । गर्भ:। ते । योनिम् । आ । शयाम् । अदु: । ते । देवा: । पुत्रम् । सोमऽपा: । उभयाविनम् ॥२५.९॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
१. स्त्री का ज्ञानवृत्तिवाला होना आवश्यक है, अत: उसे 'बार्हत्सामे' इस रूप में सम्बोधित करते हैं। हे (बार्हत्सामे) = खूब ही ज्ञानवृत्तिवाली स्त्रि! तू (विजिहीष्व) = विशेषरूप से प्रयत्न कर। (गर्भ:) = गर्भ (ते) = तेरी (योनिम् आशयान) = योनि में शयन कर रहा है। बालक के गर्भस्थ होने पर माता को ज्ञानवृत्तिवाला व क्रियाशील जीवनवाला बनना चाहिए, तभी गर्भस्थ बालक मन में शान्त, शरीर में पूर्ण स्वस्थ व क्रियाशील बन पाएगा। २. (सोमपा:) = सोम [वीर्य] का रक्षण करनेवाले (देवा:) = सब दिव्यभाव (ते) = तुझे (उभयाविनम्) = शरीर में शक्ति व मस्तिष्क में ज्ञानवाले 'उभयावी' (पुत्रम) = सन्तान को (अदू:) = देते हैं। बालक के गर्भस्थ होने पर संयमी जीवन सन्तान को 'उभयावी' बनाता है।
Essence
गर्भ-धारण करनेवाली माता शान्तवृत्ति की हो। वह संयत जीवनवाली होकर सोम का रक्षण करे। इससे सन्तान 'शक्ति व ज्ञान' दोनों से परिपूर्ण होगी।
Subject
बार्हत सामे