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Atharvaveda - Mantra 6

Atharvaveda 5/25/6

31 Sukta
13 Mantra
5/25/6
Devata- योनिः, गर्भः Rishi- ब्रह्मा Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- गर्भाधान सूक्त
Mantra with Swara
यद्वेद॒ राजा॒ वरु॑णो॒ यद्वा॑ दे॒वी सर॑स्वती। यदिन्द्रो॑ वृत्र॒हा वेद॒ तद्ग॑र्भ॒कर॑णं पिब ॥

यत् । वेद॑। राजा॑ । वरु॑ण: । यत् । वा॒। दे॒वी । सर॑स्वती। यत् । इन्द्र॑: । वृ॒त्र॒ऽहा । वेद॑ । तत् । ग॒र्भ॒ऽकर॑णम् । पि॒ब॒ ॥२५.६॥

Mantra without Swara
यद्वेद राजा वरुणो यद्वा देवी सरस्वती। यदिन्द्रो वृत्रहा वेद तद्गर्भकरणं पिब ॥

यत् । वेद। राजा । वरुण: । यत् । वा। देवी । सरस्वती। यत् । इन्द्र: । वृत्रऽहा । वेद । तत् । गर्भऽकरणम् । पिब ॥२५.६॥

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Meaning
१. (यत्) = जिसे (राजा) = नियमित [regulated] जीवनवाला (वरुणः) = वरणीय पति (वेद) = जानता है (वा) = और (यत्) = जिसे (देवी) = उत्तम व्यवहारोंवाली (सरस्वती) = समझदार पत्नी [वेद] जानती है। (यत) = जिसे (वत्रहा) = रोगकृमियों का नाशक (इन्द्रः) = रोगरूप शत्रुओं का विद्रावण करनेवाला वैद्य (वेद) = जानता है, (तत्) = उस (गर्भकरणम्) = गर्भ की स्थापक औषध को (पिब) = तू पी।
Essence
पति का मुख्य गुण 'व्यवस्थित, पाप-निवृत्त [वरुण] जीवन' है। पत्नी को उत्तम व्यवहारोंवाली व समझदार बनना है। वैद्य औषधविज्ञान में चतुर होकर गर्भ के नाशक कृमियों

को विनष्ट करता हुआ 'गर्भकरण' औषध पिलाये।
Subject
वरणीय पति, दिव्य गुणोंवाली समझदार पत्नी, चतुर वैद्य