Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 4

Atharvaveda 5/25/4

31 Sukta
13 Mantra
5/25/4
Devata- योनिः, गर्भः Rishi- ब्रह्मा Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- गर्भाधान सूक्त
Mantra with Swara
गर्भं॑ ते मि॒त्रावरु॑णौ॒ गर्भं॑ दे॒वो बृह॒स्पतिः॑। गर्भं॑ त॒ इन्द्र॑श्चा॒ग्निश्च॒ गर्भं॑ धा॒ता द॑धातु ते ॥

गर्भ॑म् । ते॒ । मि॒त्रावरु॑णौ । गर्भ॑म् । दे॒व: । बृह॒स्पति॑: । गर्भ॑म् । ते॒ । इन्द्र॑:। च॒ । अ॒ग्नि: । च॒ । गर्भ॑म् । धा॒ता । द॒धा॒तु॒ । ते॒ ॥२५.४॥

Mantra without Swara
गर्भं ते मित्रावरुणौ गर्भं देवो बृहस्पतिः। गर्भं त इन्द्रश्चाग्निश्च गर्भं धाता दधातु ते ॥

गर्भम् । ते । मित्रावरुणौ । गर्भम् । देव: । बृहस्पति: । गर्भम् । ते । इन्द्र:। च । अग्नि: । च । गर्भम् । धाता । दधातु । ते ॥२५.४॥

Meaning
१. (ते गर्भम्) = तेरे गर्भ को (मित्रावरुणौ) = मित्र और वरुण धारण करें, अर्थात् तू इस समय स्नेह व निषता की वृत्तिवाली बन। तब बालक भी इन्हीं वृत्तियोंवाला होगा। (देव:) = प्रकाशमय जीवनवाला (बृहस्पति:) = ब्रह्मणस्पति (गर्भम्) = तेरे गर्भ को धारण करे। तू देववृत्ति की तथा ज्ञान रुचितावाली बन तब बालक भी देववृत्ति व ज्ञान-रुचिता को लिये हुए होगा। २. (इन्द्रः च अग्नि: च) = बल व प्रकाश के देव (ते) = तेरे (गर्भम्) = गर्भ को धारण करें। तू बल व प्रकाश का सम्पादन करने की इच्छा व यत्न कर, तब सन्तान भी ऐसी ही होगी। (धाता) = वह सबका धारक प्रभुते (गर्भ दधातु) = तेरे गर्भ को धारण करे। पति कहता है कि मुझे क्या रक्षण करना, प्रभु ही रक्षा करेंगे। तू भी धारणात्मक वृत्तिवाली बनना। गर्भस्थ बालक भी इसी वृत्ति को लेकर जन्म लेगा।
Essence
गर्भधारण करनेवाली माता 'स्नेह, निद्वेषता, दिव्यता, ज्ञान, बल, प्रकाश व धारणात्मक वृत्ति को धारण करे तब बालक भी इन्हीं वृत्तियों को लेकर उत्पन्न होगा।


 
Subject
मित्रावरुणौ, इन्द्राग्नी

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.