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Atharvaveda - Mantra 2

Atharvaveda 5/25/2

31 Sukta
13 Mantra
5/25/2
Devata- योनिः, गर्भः Rishi- ब्रह्मा Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- गर्भाधान सूक्त
Mantra with Swara
यथे॒यं पृ॑थि॒वी म॒ही भू॒तानां॒ गर्भ॑माद॒धे। ए॒वा द॑धामि ते॒ गर्भं॒ तस्मै॒ त्वामव॑से हुवे ॥

यथा॑ । इ॒यम् । पृ॒थि॒वी । म॒ही । भू॒ताना॑म् । गर्भ॑म् । आ॒ऽद॒धे ।ए॒व । आ । द॒धा॒मि॒ । ते॒ । गर्भ॑म् । तस्मै॑ । त्वाम् । अव॑से । हु॒वे॒ ॥२५.२॥

Mantra without Swara
यथेयं पृथिवी मही भूतानां गर्भमादधे। एवा दधामि ते गर्भं तस्मै त्वामवसे हुवे ॥

यथा । इयम् । पृथिवी । मही । भूतानाम् । गर्भम् । आऽदधे ।एव । आ । दधामि । ते । गर्भम् । तस्मै । त्वाम् । अवसे । हुवे ॥२५.२॥

Meaning
१. पत्नी पति से कहती है-(यथा) = जैसे (इयम्) = यह (मही पृथिवी) = महनीय भूमि (भूतानाम्) = सब प्राणियों के (गर्भम्) = गर्भ को (आदधे) = धारण करती है। (एव) = इसीप्रकार मैं (ते) = तेरे (गर्भम्) = गर्भ को (दधामि) = धारण कर रही हूँ। २. (तस्मै अवसे) = उस गर्भ के रक्षण के लिए (त्वाम् हुवे) = तुझे पुकारती हूँ। गर्भरक्षण व पोषण के लिए जो भी आवश्यक साधन हैं, उन्हें जुटाने के लिए मैं आपसे कहती हूँ।

 
Essence
पत्नी जब गर्भधारण करती है तब पति को उसके रक्षण के सब साधनों को जुटाना ही चाहिए।
Subject
गर्भधारिका पत्नी का रक्षक पति

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