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Atharvaveda - Mantra 12

Atharvaveda 5/25/12

31 Sukta
13 Mantra
5/25/12
Devata- योनिः, गर्भः Rishi- ब्रह्मा Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- गर्भाधान सूक्त
Mantra with Swara
सवि॑तः॒ श्रेष्ठे॑न रू॒पेणा॒स्या नार्या॑ गवी॒न्योः। पुमां॑सं पु॒त्रमा धे॑हि दश॒मे मा॒सि सूत॑वे ॥

सवि॑त: । श्रेष्ठे॑न । रू॒पेण॑ । अ॒स्या: । नार्या॑: । ग॒वी॒न्यो: । पुमां॑सम् । पु॒त्रम् । आ । धे॒हि॒ । द॒श॒मे । मा॒सि । सूत॑वे ॥२५.१२॥

Mantra without Swara
सवितः श्रेष्ठेन रूपेणास्या नार्या गवीन्योः। पुमांसं पुत्रमा धेहि दशमे मासि सूतवे ॥

सवित: । श्रेष्ठेन । रूपेण । अस्या: । नार्या: । गवीन्यो: । पुमांसम् । पुत्रम् । आ । धेहि । दशमे । मासि । सूतवे ॥२५.१२॥

Meaning
१. हे (धात:) = सबका धारण करनेवाले! (त्वष्ट:) = सबके निर्मात:-विश्वकर्मन् प्रभो! हे (सवितः) = सबको जन्म देनेवाले! (प्रजापते) = प्रजाओं के रक्षक प्रभो! (श्रेष्ठेन रूपेण) = सर्वोत्तम रूप के साथ (अस्याः नार्या:) = इस नारी की (गवीन्यो:) = गर्भधारक दोनों पार्श्वस्थ नाड़ियों में (पुमांसम्) = अपने जीवन को पवित्र बनानेवाले वीर [नकि नामर्द] (पुत्रम्) = सन्तान को (दशमे मासि सूतवे) = दसवें महीने में उत्पन्न होने के लिए (आधेहि) = सम्यक् स्थाति कीजिए। २. प्रभु ही सबका धारण करते हैं। वे ही सबके निर्माता हैं, वे जन्म देनेवाले [व प्रेरित करनेवाले] प्रभु प्रजाओं के रक्षक हैं।
Essence
बालक के गर्भस्थ होने पर उस धाता, त्वष्टा, सविता, प्रजापति' प्रभु का स्मरण करनेवाली नारी ठीक समय पर पवित्र, वीर सन्तान को जन्म देती है।

 
Subject
पुमांसं पुत्रम्
Special
अगले सूक्क का ऋषि भी 'ब्रह्मा' ही है। यह उत्तम सन्तान यज्ञादि कर्मों में प्रवृत्त होती है।




 

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