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Atharvaveda - Mantra 7

Atharvaveda 5/17/7

31 Sukta
18 Mantra
5/17/7
Devata- ब्रह्मजाया Rishi- मयोभूः Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- ब्रह्मजाया सूक्त
Mantra with Swara
ये गर्भा॑ अव॒पद्य॑न्ते॒ जग॒द्यच्चा॑पलु॒प्यते॑। वी॒रा ये तृ॒ह्यन्ते॑ मि॒थो ब्र॑ह्मजा॒या हि॑नस्ति॒ तान् ॥

ये । गर्भा॑: । अ॒व॒ऽपद्य॑न्ते । जग॑त् । यत् । च॒ । अ॒प॒ऽलु॒प्यते॑ । वी॒रा: । ये । तृ॒ह्यन्ते॑ । मि॒थ: । ब्र॒ह्म॒ऽजा॒या । हि॒न॒स्ति॒ । तान् ॥१७.७॥

Mantra without Swara
ये गर्भा अवपद्यन्ते जगद्यच्चापलुप्यते। वीरा ये तृह्यन्ते मिथो ब्रह्मजाया हिनस्ति तान् ॥

ये । गर्भा: । अवऽपद्यन्ते । जगत् । यत् । च । अपऽलुप्यते । वीरा: । ये । तृह्यन्ते । मिथ: । ब्रह्मऽजाया । हिनस्ति । तान् ॥१७.७॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. (ये गर्भाः अवपद्यन्ते) = जो गर्भ गिराये जाते हैं, (यत् च) = और जो (जगत् अपलुप्यते) = संसार लूटा जाता है अथवा ये (वीरा:) = जो वीर (मिथ:) = आपस में (तह्यन्ते) = हिंसित किये जाते हैं, युद्धों में एक-दूसरे से काटे जाते हैं, (तान्) = उन्हें (ब्रह्मजाया) = वेदवाणी ही निरान्त होने पर (हिनस्ति) = नष्ट करती है। २. जब वेदवाणी का स्वाध्याय नहीं रहता तब लोगों के जीवन संयमी नहीं रहते। भोगविलास में पड़े ये गृहस्थी अधिक सन्तानों के पालन के भय से भौत हुए-हुए गर्भ गिरने को ही श्रेयस्कर समझते हैं, चोरियों और डाके बढ़ जाते है तथा वीर लोग भी युद्धों में परस्पर लड़कर मारे जाते हैं।
Essence
वेदवाणी के स्वाध्याय के अभाव में लोगों की प्रवृत्ति गर्मों को गिराने, लूटमार करने व परस्पर लड़ने की हो जाती है। यही तो अध: पतन है।
Subject
तीन दुष्परिणाम