Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 11

Atharvaveda 5/16/11

31 Sukta
11 Mantra
5/16/11
Devata- एकवृषः Rishi- विश्वामित्रः Chhanda- आसुरी Suktam- वृषरोगनाशमन सूक्त
Mantra with Swara
यद्ये॑काद॒शोऽसि॒ सोऽपो॑दकोऽसि ॥

यदि॑ । ए॒का॒द॒श: । असि॑ । स: । अप॑ऽउदक: । अ॒सि॒ ॥१६.११॥

Mantra without Swara
यद्येकादशोऽसि सोऽपोदकोऽसि ॥

यदि । एकादश: । असि । स: । अपऽउदक: । असि ॥१६.११॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
१. (यदि एकदशः असि) = यदि तू ग्यारहवें मनवाला है, अर्थात् मन को तूने वश में किया है तो तू (अपोदकः असि) = [अपनद्धम् उदकं येन] अपोदक है-रेत:कणरूप जलों का शरीर में ही बाँधनेवाला है और वस्तुत: इन रेत:कणरूप जलों [आपः रेतो भूत्वा०] को शरीर में बाँधने पर ही जीवन रसमय बनता है। मन को वशीभूत कर लेने पर सब इन्द्रियों तो वशीभूत हो ही जाती हैं, ये इन्द्रियाँ विषयों की ओर न जाकर शक्तिशाली बनती हैं।
Essence
मन को वशीभूत करने पर सब इन्द्रियाँ भी सशक्त बनती हैं। वैषयिक वृत्ति न होने पर शरीर में शक्ति की ऊर्ध्व गति होती है और जीवन आनन्दमय बनता है।
Subject
अपोदकः
Special
यह अपोदक ही जीवन को नीरोग व निर्मल बनाकर 'मयोभू' बनता है-कल्याण को उत्पन्न करनेवाला। यही अगले तीन सूक्तों का ऋषि है।