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Atharvaveda - Mantra 9

Atharvaveda 5/15/9

31 Sukta
11 Mantra
5/15/9
Devata- मधुलौषधिः Rishi- विश्वामित्रः Chhanda- भुरिगनुष्टुप् Suktam- रोगोपशमन सूक्त
Mantra with Swara
नव॑ च मे नव॒तिश्च॑ मेऽपव॒क्तार॑ ओषधे। ऋत॑जात॒ ऋता॑वरि॒ मधु॑ मे मधु॒ला क॑रः ॥

नव॑ । च॒ । मे॒ । न॒व॒ति: । च । मे॒ । अ॒प॒ऽव॒क्तार॑: । ओ॒ष॒धे॒ । ऋत॑ऽजाते । ऋत॑ऽवारि । मधु॑ । मे॒ । म॒धु॒ला । क॒र॒:॥१५.९॥

Mantra without Swara
नव च मे नवतिश्च मेऽपवक्तार ओषधे। ऋतजात ऋतावरि मधु मे मधुला करः ॥

नव । च । मे । नवति: । च । मे । अपऽवक्तार: । ओषधे । ऋतऽजाते । ऋतऽवारि । मधु । मे । मधुला । कर:॥१५.९॥

Meaning
मेरे जीवन के अट्ठासी वर्ष मुझसे दोषों को पृथक् रखनेवाले हों। शेष पूर्ववत् ।
Essence
जीवन में सदा ही दोषों के आजाने की सम्भावना बनी रहती है। मैं सदा वेदवाणी को अपनाते हुए दोषों को दूर रखने के लिए यत्नशील रहूँ।
Subject
तेतीस से एकसौ दस तक

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