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Atharvaveda - Mantra 7

Atharvaveda 5/15/7

31 Sukta
11 Mantra
5/15/7
Devata- मधुलौषधिः Rishi- विश्वामित्रः Chhanda- भुरिगनुष्टुप् Suktam- रोगोपशमन सूक्त
Mantra with Swara
स॒प्त च॑ मे सप्त॒तिश्च॑ मेऽपव॒क्तार॑ ओषधे। ऋत॑जात॒ ऋता॑वरि॒ मधु॑ मे मधु॒ला क॑रः ॥

स॒प्त । च॒ । मे॒ । स॒प्त॒ति: । च । मे॒ । अ॒प॒ऽव॒क्तार॑: । ओ॒ष॒धे॒ । ऋत॑ऽजाते । ऋत॑ऽवारि । मधु॑ । मे॒ । म॒धु॒ला । क॒र॒: ॥१५.७॥

Mantra without Swara
सप्त च मे सप्ततिश्च मेऽपवक्तार ओषधे। ऋतजात ऋतावरि मधु मे मधुला करः ॥

सप्त । च । मे । सप्तति: । च । मे । अपऽवक्तार: । ओषधे । ऋतऽजाते । ऋतऽवारि । मधु । मे । मधुला । कर: ॥१५.७॥

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1 Bhashyas
Meaning
मेरे जीवन के सतत्तर वर्ष मुझसे दोषों को पृथक् रखनेवाले हों। शेष पूर्ववत् ।
Essence
जीवन में सदा ही दोषों के आजाने की सम्भावना बनी रहती है। मैं सदा वेदवाणी को अपनाते हुए दोषों को दूर रखने के लिए यत्नशील रहूँ।


 
Subject
तेतीस से एकसौ दस तक